क्या आप जानते हैं कि अगर कोई इंसान प्रकाश की गति यानी लाइट स्पीड (3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड) से अंतरिक्ष में यात्रा करे, तो वह पृथ्वी पर मौजूद लोगों की तुलना में धीमे उम्रदराज होगा?
यह कोई फिल्मी कल्पना नहीं, बल्कि अल्बर्ट आइंस्टीन की मशहूर सापेक्षता (Relativity) थ्योरी पर आधारित वैज्ञानिक विचार है।
कैसे होता है ये?
सापेक्षता के सिद्धांत के अनुसार, जब कोई वस्तु प्रकाश की गति के करीब पहुंचती है, तो उसके लिए समय धीमा हो जाता है — इसे कहते हैं टाइम डाइलेशन (Time Dilation)।
उदाहरण के लिए, अगर कोई यात्री किसी स्पेसशिप में लाइट स्पीड के करीब जाकर 10 साल अंतरिक्ष में बिताता है, तो हो सकता है कि पृथ्वी पर सैकड़ों साल बीत जाएं। यानी जब वह वापस लौटे, तब उसके परिचित या धरती की सभ्यता ही बदल चुकी हो।

क्या सच में अमर होता है इंसान
सबसे पहली बात तो कोई इंसान प्रकाश की गति से यात्रा नहीं कर सकता है और अगर ऐसा होता भी है तो प्रकाश की गति से यात्रा करने पर इंसान अमर नहीं हो सकता है। प्रकाश की गति के करीब यात्रा करने से समय का फैलाव होगा, जिससे कि यात्रा करने वाले शख्स के लिए समय धीमा हो जाएगा, वहीं धरती पर समय सामान्य गति से चलेगा। सापेक्षता के सिद्धांत के अनुसार जब भी कोई चीज प्रकाश की गति के करीब पहुंचती है, तो उसके लिए समय धीमा हो जाता है, जबकि धरती पर समय सामान्य तरीके से ही चलता रहता है।
वैज्ञानिक इसे कैसे देखते हैं?
फिलहाल मानव शरीर को लाइट स्पीड पर ले जाना व्यवहारिक रूप से असंभव है, क्योंकि इतनी गति से यात्रा करने के लिए असीमित ऊर्जा की ज़रूरत होगी। लेकिन यह विचार अंतरिक्ष यात्रा, समय और जीवन की अवधारणाओं पर एक अभूतपूर्व दृष्टिकोण जरूर देता है।
टाइम की स्पीड से ट्रैवेल करने पर क्या होगा
हालांकि लाइट की स्पीड से ट्रैवेल करने पर इंसान किसी भी दूसरी चीजों को तेजी से देख सकता है। उसको तारे, आकाशगंगा और अन्य खगोलीय पिंड तेजी से अपना स्थान बदलते हुए नजर आएंगे। इसके जरिए एक अद्भुद सीन दिखाई देगा और उसमें ब्रह्मांड के सारे रहस्यों का पता लगाने का मौका मिलेगा। प्रकाश की गति से यात्रा करते वक्त यह संभव है कि आप एक प्वाइंट से दूसरे प्वाइंट पर कूद जाएं, इस वजह से समय और दूरी में बदलाव आएगा।