कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के स्थानीय चुनावों में इस्तेमाल हुए ‘इरेज़ेबल इंक’ यानी मिटाया जा सकने वाला स्याही विवाद को लेकर शुक्रवार को चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि इससे लोकतंत्र में लोगों का विश्वास “भ्रष्ट” हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘वोट चोरी’ देश के खिलाफ किया गया एक गंभीर कृत्य है, और चुनाव आयोग द्वारा मतदाताओं को गुमराह करने की कोशिशें लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर संकट पैदा कर रही हैं।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा करते हुए लिखा कि जो स्याही महाराष्ट्र की नगरपालिका चुनावों में लगाई गई, वह आसानी से मिटाई जा सकती थी। गांधी ने कहा, “चुनाव आयोग द्वारा नागरिकों को धोखा देना यही कारण है कि हमारे लोकतंत्र में विश्वास ढह गया है। वोट चोरी एक राष्ट्रविरोधी कृत्य है।”
यह बयान ऐसे समय आया है जब महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग (SEC) ने कथित तौर पर मिटाई जा सकने वाली स्याही के उपयोग के बारे में दर्ज शिकायतों की जांच का आदेश दिया है। आयोग ने यह भी चेतावनी दी है कि भ्रम फैलाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
महाराष्ट्र चुनाव आयोग ने पूछा ‘इरेज़ेबल इंक’ विवाद का अल्पकालिक निरीक्षण
गुरूवार को महाराष्ट्र SEC ने उन शिकायतों के संबंध में जांच शुरू करने का निर्देश दिया, जिनमें आरोप लगाया गया कि नगरपालिका चुनावों में इस्तेमाल की गई इलेक्टोरल इंक (मतदाता की उंगली पर लगाए जाने वाली निशान वाली स्याही) सामान्य ‘अस्थायी स्याही’ जैसी थी जिसे आसानी से हटाया जा सकता था। इस विवाद को लेकर राजनीति गर्मा गई है और विपक्षी दलों सहित बड़ी संख्या में मतदाताओं के बीच भी चिंता पैदा हो गई है।
SEC ने साफ किया कि यदि चुनाव के दौरान किसी भी मतदाता की उंगली पर लगा इंक हटाने का प्रयास किया जाता है, या इसके बारे में भ्रम फैलाया जाता है, तो वह गैरकानूनी कार्य माना जाएगा। आयोग ने कहा है कि ऐसे किसी भी प्रयास में शामिल व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
महाराष्ट्र SEC के मतानुसार, मतदान के बाद संबंधित व्यक्ति को फिर से मतदान करने की अनुमति नहीं दी जाएगी, भले ही उसने उंगली से स्याही हटा ली हो। आयोग ने कहा कि मतदान के बाद हर मतदाता का रिकॉर्ड तैयार किया गया है, इसलिए स्याही को हटाना भी मतदाता को पुनः वोट डालने का अधिकार नहीं देता।
उद्धव ठाकरे द्वारा आयोग पर लगाए गंभीर आरोप
इस विवाद को राजनीतिक रूप देने में शिव सेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने राज्य चुनाव आयुक्त दिनेश वाघमरे पर “भाजपा‑नेतृत गठबंधन के पक्ष में खुलकर झुकने” का आरोप लगाया है। ठाकरे ने यह भी मांग की है कि वाघमरे को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाना चाहिए।
ठाकरे का कहना है कि यदि चुनाव में इस्तेमाल की गई स्याही वास्तव में मिटाई जा सकती है, तो इससे वोटिंग प्रणाली की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल उठता है। उन्होंने कहा है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की रक्षा के लिए आरोपों की निष्पक्ष और त्वरित जांच होनी चाहिए।
हालांकि वाघमरे ने कहा है कि इन आरोपों में कोई आधार नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो स्याही आम स्याही है और न ही उसे इतनी आसानी से हटाया जा सकता है कि कोई व्यक्ति दोबारा मतदान कर सके।
चुनाव आयोग की स्पष्ट चेतावनी
SEC ने अपने बयान में कहा है:
“मतदाता के मतदान के पश्चात उनकी उंगली पर लगाई गई इंक को हटाने का कोई भी प्रयास और मतदान प्रक्रिया में भ्रम पैदा करना अवैध है। अगर कोई व्यक्ति इंक को हटाकर पुनः मतदान करने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ उपयुक्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
आयोग ने यह भी बताया कि सभी मतदान कर्मियों को स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं कि मतदान के बाद किसी भी व्यक्ति को फिर से वोट देना निषिद्ध है, चाहे उसने स्याही को मिटाने का प्रयास किया हो या नहीं। मतदान के बाद मतदाता सूची और रिकॉर्ड तैयार किया जाता है, इसलिए दोबारा मतदान नहीं हो सकता।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और विवाद की गहराई
इस मुद्दे ने राजनीतिक स्तर पर गतिरोध पैदा कर दिया है। विपक्षी दलों ने इसे मतदाता अधिकारों पर हमला, लोकतांत्रिक प्रक्रिया में छेड़छाड़, और चुनावी ईमानदारी पर सवाल के रूप में उठाया है। राहुल गांधी और उद्धव ठाकरे जैसे नेताओं ने इसे चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठा हुआ एक बड़ा आरोप बताया है।
गांधी ने कहा कि वोट चोरी केवल एक तकनीकी गलती नहीं है बल्कि यह राष्ट्रविरोधी कार्य है जो लोकतंत्र को कमजोर करता है। उन्होंने लोगों में यह संदेश फैलाया है कि अगर उनके मत की शक्ति सुरक्षित नहीं है, तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया की साख पर बड़ा सवाल उठता है।
वहीं, बीजेपी और उससे जुड़ी सरकार की ओर से इस बात का जवाब दिया गया है कि यह केवल अफ़वाह और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों द्वारा फैलाया भ्रम है। उनके अनुसार, चुनाव आयोग ने आवश्यक सभी सुरक्षा उपाय किए हैं और स्याही पूरी तरह से विश्वसनीय है।
लोकतंत्र में विश्वास और सत्य की तलाश
महाराष्ट्र के नगरपालिका चुनावों के पश्चात ‘इरेज़ेबल इंक’ विवाद ने न सिर्फ राजनीतिक दलों के बीच तनाव बढ़ा दिया है, बल्कि आम जनता में लोकतंत्र और मतदान प्रक्रिया की विश्वसनीयता के बारे में सवाल उठा दिए हैं। जब एक वरिष्ठ विपक्षी नेता सीधे चुनाव आयोग पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगा सकता है, तो यह संकेत है कि मतदाता विश्वास संकट की स्थिति से गुजर रहा है।
चुनाव आयोग की जांच, आयोग के बयान, विपक्षी दलों के आरोप और राजनीतिक प्रतिक्रिया इसे एक बड़ा संवैधानिक और लोकतांत्रिक सवाल बनाते हैं। निश्चित रूप से इस विवाद का हल स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होना चाहिए ताकि लोकतंत्र में विश्वास कायम रह सके और मतदाता यह विश्वास कर सकें कि उनका हर वोट सुरक्षित है।