गुरु नानक गर्ल्स पी.जी. कॉलेज में हाल ही में हर्षोल्लास के साथ पावन लोहड़ी पर्व मनाया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. सुरभि गर्ग, प्रबंध समिति की सदस्य श्रीमती रबिन्दर कौर, एवं समस्त स्टाफ उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत लोहड़ी की पवित्र अग्नि प्रज्ज्वलित करने के साथ हुई, जिसमें सभी उपस्थित लोगों ने गुड़ और तिल डालकर ईश्वर से प्रार्थना की कि जैसे काले तिल जलते हैं वैसे ही अज्ञानता और पाप हमारे जीवन से दूर हों और हम सत्कर्मों की ओर अग्रसर होकर पारिवारिक एवं वैश्विक समृद्धि प्राप्त कर सकें।

इस अवसर पर सभी ने परमपिता परमात्मा के चरणों में धन्यवाद ज्ञापित किया और सभी के जीवन में सुख, शांति, और प्रगति की मंगलकामनाएँ कीं। प्राचार्या महोदया डॉ. सुरभि गर्ग ने उपस्थित छात्राओं और स्टाफ को लोहड़ी की बधाई देते हुए उज्जवल और सफल जीवन की शुभकामनाएँ दीं।
कार्यक्रम की पारंपरिक और सांस्कृतिक झलक देते हुए, डॉ. रंजीत कौर ने लोहड़ी पर्व की महत्ता और इसके सामाजिक एवं सांस्कृतिक आयामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने “40 मुक्तो की कथा” सुनाई और बताया कि किस प्रकार 40 सिंहों के बेदावा फाड़ने का संदेश हमें नकारात्मकताओं से मुक्ति और सत्कर्मों की ओर प्रेरित करता है। इसके साथ ही उन्होंने सुंदरिया-मुदरिया की लोककथा भी साझा की, जो पर्व की मनोरंजक और शिक्षाप्रद झलक पेश करती है।

डॉ. रंजीत कौर ने यह भी बताया कि यह पर्व नववधुओं और नवजात शिशुओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस अवसर पर डॉ. गुरजीत कौर और डॉ. शाहीन फातिमा की पहली लोहड़ी को भी भव्यता के साथ मनाया गया। सभी ने उनके नवीन जीवन में पूर्णता, संपन्नता और सफलता की कामना करते हुए उनकी झोली भरकर आशीर्वाद दिया।
छात्राओं की प्रस्तुतियाँ इस पर्व का सबसे आकर्षक हिस्सा थीं। छात्राओं ने रंग-बिरंगे परिधानों में उत्साहपूर्वक भांगड़ा और गिद्दा प्रस्तुत किया, जिससे कार्यक्रम का वातावरण आनंद और उल्लास से भर गया। इसके अतिरिक्त, सभी ने लोहड़ी की परिक्रमा कर एक-दूसरे को बधाइयाँ दी और पर्व की खुशियाँ साझा कीं।
कार्यक्रम के समापन पर प्राचार्या महोदया ने सभी को लोहड़ी की बधाई और उज्जवल जीवन का आशीर्वाद दिया। अंत में सभी ने प्रसाद ग्रहण किया और इस पावन अवसर को यादगार बनाते हुए लौटे।
गुरु नानक गर्ल्स पी.जी. कॉलेज में यह लोहड़ी समारोह केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं था, बल्कि सांस्कृतिक शिक्षा, सामाजिक मान्यताओं और पारिवारिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का भी एक मंच साबित हुआ। इस प्रकार, महाविद्यालय ने परंपराओं और आधुनिक शिक्षा के सामंजस्य के साथ यह पर्व सफलतापूर्वक मनाया।