विन न्यूज़ नेटवर्क। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल सोमवार को 23वें दिन भी जारी रही। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक सार्वजनिक संदेश जारी कर स्पष्ट किया कि वे अपना अनशन तभी समाप्त करेंगे, जब उनकी ओर से रखी गई तीन प्रमुख शर्तों में से कम से कम एक पूरी होगी। साथ ही उन्होंने दावा किया कि उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध रोका गया है और वे स्वतंत्र रूप से आवाजाही नहीं कर पा रहे हैं।
यह पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आया है, जब संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत के साथ शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और छात्रों के मुद्दों को लेकर राजधानी दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन तेज हो गए हैं।
क्या हैं सोनम वांगचुक की तीन शर्तें?
अपने संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा कि, यदि केंद्र सरकार शिक्षा व्यवस्था में हुई कथित विफलताओं की जिम्मेदारी स्वीकार करती है, या संसद के सदस्य यह भरोसा दिलाते हैं कि छात्रों से जुड़े मुद्दों पर संसद में गंभीर चर्चा होगी, तो वे अपना अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों के कारण उनके लिए बाहर आना संभव नहीं है, तो जनप्रतिनिधि अस्पताल पहुंचकर छात्रों की मांगों पर ठोस आश्वासन दें। उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य किसी टकराव की स्थिति पैदा करना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में जवाबदेही तय कराना है।
सफदरजंग अस्पताल से संसद मार्च में शामिल होने की इच्छा जताई
सोनम वांगचुक ने सोमवार को सफदरजंग अस्पताल के निदेशक को एक पत्र लिखकर कुछ समय के लिए अस्पताल से बाहर जाने की अनुमति मांगी। पत्र में उन्होंने कहा कि उनकी स्वास्थ्य जांच सामान्य है और वे स्वयं को बेहतर महसूस कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें संसद मार्च में शामिल होने की अनुमति दी जाए।
पत्र सार्वजनिक करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि यदि प्रशासन का कहना है कि वे किसी प्रकार की हिरासत में नहीं हैं, तो फिर उनकी आवाजाही पर रोक क्यों लगाई जा रही है। उन्होंने कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से लोगों से मिलना और आंदोलन में भाग लेना चाहते हैं।
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बाद अस्पताल पहुंचे थे वांगचुक
सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे थे। यह आंदोलन प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों, विशेष रूप से नीट (NEET) परीक्षा विवाद, और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर चल रहा है।
18 जुलाई को दिल्ली पुलिस उन्हें जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले गई थी। इसके बाद से उनका अनशन अस्पताल में ही जारी है। वांगचुक का कहना है कि स्थान बदलने के बावजूद उन्होंने अपना आंदोलन समाप्त नहीं किया है।
संसद मार्च को लेकर बढ़ी हलचल
इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन ‘संसद चलो’ मार्च का आह्वान किया है। संगठन का कहना है कि यह मार्च छात्रों, अभ्यर्थियों और बेरोजगार युवाओं की आवाज संसद तक पहुंचाने के लिए आयोजित किया गया है।
हालांकि दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस मार्च के लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं दी गई है। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए राजधानी के कई संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
पत्नी की याचिका पर हाई कोर्ट में सुनवाई
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर उन्हें सफदरजंग अस्पताल से उनकी पसंद के निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की मांग की है।
यह याचिका उस आदेश को चुनौती देती है, जिसमें एकल पीठ ने निजी अस्पताल में स्थानांतरण की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। अब इस मामले पर दिल्ली हाई कोर्ट की खंडपीठ सुनवाई करेगी। अदालत की कार्यवाही पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका असर वांगचुक की आगे की चिकित्सा व्यवस्था और आंदोलन दोनों पर पड़ सकता है।
शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवाल
सोनम वांगचुक लगातार यह कहते रहे हैं कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध के लिए नहीं है, बल्कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से उठाने के लिए है। उनका मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
फिलहाल राजधानी में आंदोलन और कानूनी प्रक्रिया दोनों साथ-साथ चल रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार, संसद और न्यायपालिका के स्तर पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।