नई दिल्ली। मालेगांव ब्लास्ट केस में एक महत्वपूर्ण गवाह मिलिंद जोशी ने अदालत में यह दावा किया कि महाराष्ट्र ATS के अधिकारीयों ने उन्हें उच्च दबाव और प्रताड़ना के तहत उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अनेक RSS नेताओं का नाम लेने के लिए मजबूर किया।
तत्कालीन ATS जांच अधिकारी महबूब मुजावर ने भी कहा कि उनपर RSS प्रमुख मोहन भागवत को गिरफ्तार करने एवं “भगवा आतंकवाद” की कल्पनापूर्ण थ्योरी को साबित करने का दबाव था।
NIA विशेष न्यायाधीश ने ATS की जांच पद्धति पर चिंता जताई, और इन बयानबाजियों को गैर-सहमन्वयित प्रमाणों और कथन की विश्वसनीयता पर प्रश्न खड़ा किया 31 जुलाई 2025 को विशेष NIA कोर्ट ने सातों आरोपियों को साक्ष्यों की कमी के आधार पर बरी कर दिया
खुलासों की पृष्ठभूमि और कानूनी परिप्रेक्ष्य
मिलिंद जोशी, जो मालेगांव विस्फोट की प्रारंभिक जांच में गवाह बने, ने अदालत में बताया कि DCP श्रीराव और Param Bir Singh जैसे ATS अधिकारियों ने उन्हें योगी आदित्यनाथ, स्वामी आसिमानंद, इंद्रेश कुमार, देओधर और ‘कक्काजी’ जैसे नेताओं का नाम लेने के लिए दबाव डाला। उन्होंने कहा कि यदि उन्होंने ऐसा नहीं किया, तो उन्हें गंभीर परिणाम झेलने होंगे
गवाह के अनुसार, उन्हें रिकॉर्डिंग से पहले ही कथित रूप से “स्टोरी तैयार कर दी गई थी” और उनसे उसे दोहराने की उम्मीद की गई। उन्होंने अदालत को बताया कि यह बयान ATS द्वारा लिखा गया था, न कि उन्होंने स्वयं लिखा था
महबूब मुजावर के दावे: मोहन भागवत को गिरफ्तार करने के आदेश
पूर्व ATS अधिकारी महबूब मुजावर ने इंटरव्यू में स्पष्ट किया कि उन्हें RSS प्रमुख मोहन भागवत को गिरफ्तार करने के आदेश दिए गए थे, ताकि “भगवा आतंकवाद” थ्योरी को पुष्ट किया जा सके। उन्होंने कहा कि आदेश मिलने के बाद उन्होंने सीधे नागपुर में भागवत से मिलने का प्रयास किया परंतु वह असमर्थ थे। उन्होंने इस थ्योरी को पूरी तरह झूठा बताया मुजावर ने यह भी दोष सिद्ध किया कि ऐसे आदेशों को न मानने पर उनके खिलाफ जाली केस दर्ज किए गए और उनके 40 वर्ष के पुलिस करियर को बर्बाद कर दिया गया
अदालत की टिप्पणी: ATS पर भरोसे पर उठे सवाल
NIA विशेष न्यायाधीश A.K. Lahoti ने कोर्ट के आदेश में स्पष्ट किया कि अधिकांश गवाहों ने बताया कि उनके बयान स्वेच्छा से नहीं, बल्कि जबरदस्ती और डर से लिए गए थे। उन्होंने कहा: “कथन ऐसे लिखाए गए जो गवाहों की सुनवाई से न बनते हों, बल्कि ATS द्वारा निर्देशित किए गए थे।” न्यायाधीश ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि बहुत से गवाह शिकायत दर्ज करने से डरते रहे, लेकिन कुछ ने जो साहस दिखाया वह प्रशंसनीय है। ATS की विधियों पर गंभीर आशंका जताई गई है
मालेगांव केस की वर्तमान स्थिति
31 जुलाई 2025 को विशेष NIA कोर्ट ने सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया, जिनमें साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, कर्नल प्रसाद पुरोहित और अन्य शामिल हैं। अदालत ने कहा कि ATS द्वारा पेश किए गए सबूत प्रभावी और विश्वसनीय नहीं थे, और गवाहों की कथनी में अनेक असंगतियाँ थीं इस फैसले को न्यायपालिका की निष्पक्षता और जांच एजेंसियों की अनियमितताओं की पहचान के रूप में लिया जा रहा है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
मालेगांव विस्फोट मामले में “भगवा आतंकवाद” थ्योरी लागू करने की कथित कोशिशों के खुलासे ने राजनीति और समाज को हिला कर रख दिया है। विपक्ष द्वारा आरोप लगाया गया कि यूपीए सरकार ने जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर हिंदू नेतृत्व को बदनाम करने का प्रयास किया। BJP नेता सुनील देवधर ने कहा कि यह स्पष्ट साजिश थी, जिसके तहत कांग्रेस ने हिंदू नेताओं को फंसाने की रणनीति अपनाई थी।