विन न्यूज़ नेटवर्क। बिहार की राजधानी पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव इस बार केवल एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई इस सीट पर मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। भाजपा ने अपने प्रत्याशी के रूप में अभिषेक कुमार को मैदान में उतारा है, जबकि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने रेखा गुप्ता पर भरोसा जताया है। दूसरी ओर जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर पहली बार खुद चुनावी मैदान में उतरकर मुकाबले को हाई प्रोफाइल बना चुके हैं।
करीब तीन दशक से अधिक समय से भाजपा के कब्जे वाली इस सीट पर प्रशांत किशोर पूरी ताकत के साथ चुनाव प्रचार में जुटे हैं। उनका लक्ष्य सिर्फ चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि भाजपा के मजबूत गढ़ में सेंध लगाना भी है। इसके लिए उन्होंने चार अलग-अलग स्तरों पर चुनावी रणनीति तैयार की है।
1995 से बीजेपी का अभेद्य गढ़ रही है बांकीपुर
बांकीपुर सीट भाजपा की सबसे मजबूत सीटों में मानी जाती है। वर्ष 1995 से लगातार यहां भाजपा का कब्जा रहा है। नितिन नवीन पांच बार विधायक चुने गए, जबकि उनके पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा भी चार बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। ऐसे में यह सीट भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है।
इसी मजबूत राजनीतिक पृष्ठभूमि के बीच प्रशांत किशोर ने अपना पहला चुनाव यहीं से लड़ने का फैसला किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला जोखिम भरा जरूर है, लेकिन अगर जन सुराज यहां मजबूत प्रदर्शन करती है तो राज्य की राजनीति में नया संदेश जाएगा।
पहला दांव: खुद मैदान में उतरकर घर-घर पहुंच रहे पीके
प्रशांत किशोर केवल मंचीय सभाओं तक सीमित नहीं हैं। वे रोजाना क्षेत्र की गलियों, मोहल्लों और बाजारों में जाकर लोगों से सीधा संवाद कर रहे हैं। छोटी-छोटी बैठकों, चौपालों और पदयात्राओं के जरिए वे स्थानीय नागरिकों की समस्याएं सुन रहे हैं।
प्रचार के दौरान वे लगातार यह संदेश दे रहे हैं कि बांकीपुर को वर्षों से एक ही दल ने प्रतिनिधित्व दिया, लेकिन ट्रैफिक, जलभराव, खराब सड़कें और ड्रेनेज जैसी मूल समस्याएं अब भी जस की तस हैं।
दूसरा दांव: युवा ब्रिगेड को सौंपी अहम जिम्मेदारी
जन सुराज ने चुनाव प्रचार में युवाओं को सबसे आगे रखा है। पार्टी के कार्यकर्ता सुबह छह बजे से ही पार्कों, मॉर्निंग वॉक स्थलों, चाय की दुकानों और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों से संपर्क करना शुरू कर देते हैं।
युवा टीम जातीय या धार्मिक मुद्दों की बजाय रोजगार, शिक्षा, ट्रैफिक व्यवस्था, पेयजल, जलनिकासी और शहरी सुविधाओं जैसे विषयों पर चर्चा कर रही है। पार्टी का प्रयास है कि चुनाव को स्थानीय विकास के मुद्दों पर केंद्रित रखा जाए।
तीसरा दांव: महिला वोटरों तक सीधी पहुंच
जन सुराज की महिला टीम दोपहर के समय घर-घर जाकर महिलाओं से संवाद कर रही है। प्रचार के दौरान महंगाई, महिलाओं की सुरक्षा, बच्चों की शिक्षा, रोजगार और घरेलू आर्थिक चुनौतियों जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाया जा रहा है।
महिला कार्यकर्ता परिवारों के साथ बैठकर सरकार की नीतियों पर चर्चा करती हैं और जन सुराज के चुनावी एजेंडे को समझाने की कोशिश करती हैं। पार्टी को उम्मीद है कि यह अभियान महिला मतदाताओं के बीच सकारात्मक असर छोड़ सकता है।
चौथा दांव: नुक्कड़ नाटक और सोशल मीडिया का इस्तेमाल
शाम के समय जन सुराज की सांस्कृतिक टीम मोहल्लों और चौराहों पर नुक्कड़ नाटक के माध्यम से चुनाव प्रचार कर रही है। इन प्रस्तुतियों में राज्य के विकास, बेरोजगारी, शिक्षा, भ्रष्टाचार और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दों को नाटकीय रूप में दिखाया जा रहा है।
इसके साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी पार्टी लगातार सक्रिय है। वीडियो, रील, लाइव कार्यक्रम और डिजिटल कैंपेन के जरिए युवाओं तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
सरकार के कामकाज को बना रहे चुनावी मुद्दा
प्रशांत किशोर अपने चुनाव प्रचार में इस उपचुनाव को केवल स्थानीय चुनाव नहीं, बल्कि मौजूदा सरकार के कामकाज की परीक्षा बता रहे हैं। उनका कहना है कि राजधानी पटना के बीचों-बीच स्थित बांकीपुर आज भी जलभराव, ट्रैफिक और अव्यवस्थित शहरी ढांचे जैसी समस्याओं से जूझ रहा है।
वे दावा कर रहे हैं कि यदि उनकी पार्टी को मौका मिला तो आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम, बेहतर सड़कें और रोजगार के नए अवसर तैयार किए जाएंगे।
बीजेपी के सामने चुनौती कितनी बड़ी?
भाजपा के लिए यह सीट वर्षों से सुरक्षित मानी जाती रही है, लेकिन इस बार मुकाबला पहले की तुलना में अधिक दिलचस्प हो गया है। प्रशांत किशोर की व्यक्तिगत सक्रियता, जन सुराज का नया संगठन और स्थानीय मुद्दों पर आधारित प्रचार चुनाव को त्रिकोणीय बना रहा है।
हालांकि भाजपा अपने मजबूत संगठन और लंबे जनाधार के भरोसे चुनाव लड़ रही है, लेकिन विपक्ष इस बार चुनाव को पूरी तरह मुकाबले वाला बनाने में जुटा है।
उपचुनाव पर पूरे बिहार की नजर
बांकीपुर का परिणाम सिर्फ एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं रहेगा। यह चुनाव यह भी तय करेगा कि जन सुराज बिहार की राजनीति में कितनी प्रभावी ताकत बनकर उभर सकती है। दूसरी ओर भाजपा के लिए यह अपने पारंपरिक गढ़ को बचाए रखने की परीक्षा होगी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में चुनाव प्रचार और भी तेज होगा तथा स्थानीय मुद्दे ही मतदाताओं के फैसले में अहम भूमिका निभा सकते हैं।