PoJK में प्रदर्शन पर महबूबा मुफ्ती का पाकिस्तान पर हमला, बोलीं- आवाज दबाने से नहीं, संवाद से मजबूत होता है लोकतंत्र

Vin News Network
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पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती

विन न्यूज़ नेटवर्क। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान सरकार की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि नियंत्रण रेखा (LoC) के उस पार से सामने आ रही तस्वीरें बेहद दुखद हैं और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं माना जा सकता।

महबूबा मुफ्ती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट साझा करते हुए पाकिस्तान सरकार से संयम बरतने और प्रदर्शनकारियों की मांगों को बातचीत के जरिए हल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जनता की आवाज को दबाने के बजाय उसे सुनना और उसका सम्मान करना किसी भी जिम्मेदार सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

‘बल प्रयोग नहीं, संवाद होना चाहिए’

महबूबा मुफ्ती ने अपने बयान में कहा कि नियंत्रण रेखा के उस पार से जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे बेहद पीड़ादायक हैं। उनके अनुसार, शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर बल प्रयोग किए जाने की घटनाएं चिंता का विषय हैं।

उन्होंने कहा कि यदि लोगों की कुछ मांगें हैं, तो सरकार को उन्हें सुनना चाहिए और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए। उनका मानना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती जनता की भागीदारी और संवाद से होती है, न कि दमनात्मक कदमों से।

सरकार को दी मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की सलाह

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि पाकिस्तान सरकार को मौजूदा हालात में मानवीय और संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विभिन्न रिपोर्टों में यह दावा किया जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों की कई मांगें स्थानीय मुद्दों से जुड़ी हैं, इसलिए उन्हें गंभीरता से सुना जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि बल प्रयोग और सख्ती से हालात और अधिक बिगड़ सकते हैं। सरकार को ऐसा रास्ता अपनाना चाहिए जिससे लोगों का भरोसा कायम रहे और तनाव कम हो सके।

‘किसी भी राष्ट्र की ताकत जनता के विश्वास में होती है’

अपने संदेश में महबूबा मुफ्ती ने कहा कि कोई भी देश अपने नागरिकों की आवाज को दबाकर मजबूत नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि सरकारों को यह समझना होगा कि लोकतंत्र में असहमति भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है।

उन्होंने पाकिस्तान सरकार से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग रोकने और शांति बहाल करने की दिशा में कदम उठाने की अपील की। साथ ही उन्होंने कहा कि कश्मीर के लोगों को सम्मान, न्याय और अपनी बात रखने का अधिकार मिलना चाहिए।

क्या है पूरा विवाद?

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoJK) में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है। चुनाव से पहले आरक्षित सीटों को लेकर विवाद गहरा गया है। स्थानीय संगठनों और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों का इस्तेमाल राजनीतिक प्रभाव बनाए रखने और अपनी पसंद की सरकार स्थापित करने के लिए किया जा रहा है।

इसी मुद्दे को लेकर विभिन्न इलाकों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। प्रदर्शनकारी चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रतिनिधित्व की मांग कर रहे हैं। इन विरोध प्रदर्शनों के दौरान पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

प्रदर्शन और सुरक्षा कार्रवाई के दावे

रिपोर्टों के अनुसार, कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई है। सोशल मीडिया और विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग, इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध और आवश्यक सेवाओं के प्रभावित होने जैसे दावे भी सामने आए हैं।

हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग स्रोतों से अलग-अलग जानकारी सामने आ रही है। इस बीच, क्षेत्र की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर बनी हुई है।

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