विन न्यूज़ नेटवर्क। भारत में पान खाने की परंपरा सदियों पुरानी है। कई लोग भोजन के बाद स्वाद और ताजगी के लिए पान खाते हैं, तो कुछ के लिए यह रोजमर्रा की आदत का हिस्सा बन चुका है। पान का पत्ता अपने आप में कई औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है और आयुर्वेद में भी इसका उल्लेख मिलता है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि असली खतरा पान के पत्ते से नहीं, बल्कि उसमें मिलाए जाने वाले तंबाकू, सुपारी, गुटखा और अन्य नशीले पदार्थों से होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि पान में तंबाकू या उससे जुड़े उत्पाद मिलाए जाएं, तो यह मुंह के कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि कब एक सामान्य पान स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बन जाता है।
सादा पान और तंबाकू वाला पान, दोनों में बड़ा अंतर
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि केवल पान का पत्ता खाने से आमतौर पर कैंसर का खतरा नहीं माना जाता। समस्या तब शुरू होती है जब इसमें तंबाकू, सुपारी, गुटखा, जर्दा या अन्य नशीले पदार्थ मिलाए जाते हैं।
तंबाकू में मौजूद हानिकारक रसायन और सुपारी के लगातार सेवन से मुंह के अंदर की कोशिकाओं पर बुरा असर पड़ता है। लंबे समय तक ऐसी आदत बनाए रखने से मुंह, जीभ, गाल और गले के कैंसर का खतरा काफी बढ़ सकता है।
तंबाकू शरीर को कैसे पहुंचाता है नुकसान?
तंबाकू में निकोटिन नामक पदार्थ पाया जाता है, जो शरीर में तेजी से असर करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, निकोटिन कुछ ही सेकंड में मस्तिष्क तक पहुंचकर डोपामाइन नामक न्यूरोट्रांसमीटर का स्तर बढ़ाता है। इससे कुछ समय के लिए खुशी या तनाव कम होने का एहसास होता है।
हालांकि यह असर थोड़ी देर बाद खत्म हो जाता है और शरीर फिर से निकोटिन की मांग करने लगता है। यही प्रक्रिया धीरे-धीरे लत का रूप ले लेती है।
सुपारी और अन्य पदार्थ भी बढ़ाते हैं खतरा
डॉक्टरों के मुताबिक, केवल तंबाकू ही नहीं बल्कि सुपारी का लगातार सेवन भी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। सुपारी मुंह के अंदर की परत को प्रभावित करती है और समय के साथ ऊतकों में कठोरता (ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस) पैदा कर सकती है।
इस स्थिति में मुंह पूरी तरह खोलने में कठिनाई होती है और आगे चलकर यह कैंसर का जोखिम भी बढ़ा सकती है। यदि इसके साथ तंबाकू और अन्य रसायन भी शामिल हों, तो खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
लगातार होने वाले घाव बन सकते हैं गंभीर समस्या
पान में मौजूद कुछ पदार्थ मुंह के अंदर बार-बार घाव पैदा कर सकते हैं। यदि ये घाव लंबे समय तक ठीक न हों, तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक रहने वाले घाव, सफेद या लाल धब्बे, मुंह खोलने में परेशानी, निगलने में दर्द या लगातार जलन जैसे लक्षण कैंसर की शुरुआती चेतावनी भी हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
डीएनए पर भी पड़ सकता है असर
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, तंबाकू में मौजूद कई रसायन शरीर की कोशिकाओं के डीएनए को नुकसान पहुंचा सकते हैं। डीएनए कोशिकाओं की वृद्धि और उनके सामान्य कार्यों को नियंत्रित करता है।
जब यह प्रणाली प्रभावित होती है, तो क्षतिग्रस्त कोशिकाएं नष्ट होने के बजाय तेजी से बढ़ने लगती हैं। यही असामान्य वृद्धि आगे चलकर कैंसर का रूप ले सकती है।
कैसे करें बचाव?
डॉक्टरों का कहना है कि मुंह के कैंसर से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका तंबाकू और उससे जुड़े सभी उत्पादों से दूरी बनाना है।
विशेषज्ञ इन बातों का ध्यान रखने की सलाह देते हैं—
- तंबाकू, गुटखा और जर्दा युक्त पान से बचें।
- सुपारी का नियमित सेवन भी सीमित करें।
- मुंह में कोई घाव 2 सप्ताह से अधिक रहे तो डॉक्टर से जांच कराएं।
- नियमित रूप से दंत चिकित्सक से ओरल हेल्थ चेकअप कराएं।
- तंबाकू छोड़ने में कठिनाई हो तो विशेषज्ञ की मदद लें।
स्वाद से ज्यादा जरूरी है सेहत
पान भारतीय संस्कृति का हिस्सा जरूर है, लेकिन उसमें मिलाए जाने वाले नशीले और हानिकारक पदार्थ स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। थोड़े समय का स्वाद भविष्य में बड़ी बीमारी की वजह बन सकता है। इसलिए यदि पान खाने की आदत है, तो उसे तंबाकू और अन्य हानिकारक पदार्थों से दूर रखना ही समझदारी है।