देशभर में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून लगातार रफ्तार पकड़ रहा है। मौसम विभाग के ताजा अपडेट के मुताबिक 30 जून तक मॉनसून मध्य प्रदेश के कुछ और हिस्सों, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार के शेष क्षेत्रों, उत्तर प्रदेश के कुछ भागों, उत्तराखंड के अधिकांश इलाकों और हिमाचल प्रदेश तथा लद्दाख के कुछ हिस्सों तक पहुंच चुका है। इसके साथ ही पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में बारिश का दौर शुरू होने लगा है।
मौसम विभाग के अनुसार मॉनसून की उत्तरी सीमा इस समय सूरत, इंदौर, सागर, सीधी, आजमगढ़, अयोध्या, बरेली, देहरादून और मंडी से होकर गुजर रही है। इस सीमा के दक्षिण में आने वाले क्षेत्रों में अच्छी बारिश दर्ज की जा रही है, जबकि इससे उत्तर के इलाकों में मॉनसून के पूरी तरह सक्रिय होने का इंतजार है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले दो से तीन दिनों के दौरान मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल बनी हुई हैं। इसी दौरान इसके उत्तरी अरब सागर के कुछ हिस्सों, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बाकी क्षेत्रों, दमन और दीव, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब के अधिकांश हिस्सों और राजस्थान के कुछ इलाकों तक पहुंचने की संभावना है। यदि अनुमान सही साबित होता है तो लंबे समय से भीषण गर्मी झेल रहे दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों को जल्द राहत मिल सकती है।
आमतौर पर मॉनसून पूरे देश में 8 जुलाई तक फैलता है, लेकिन इस वर्ष इसकी प्रगति सामान्य से कुछ तेज दिखाई दे रही है। 30 जून तक इसका देहरादून, मंडी और जम्मू-कश्मीर की ओर पहुंच जाना इस बात का संकेत है कि उत्तर भारत में बारिश का इंतजार जल्द खत्म हो सकता है।
समय पर मॉनसून का पहुंचना केवल मौसम की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि कृषि और जल संसाधनों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। खरीफ सीजन की प्रमुख फसल धान की बुवाई बड़े पैमाने पर मानसूनी बारिश पर निर्भर करती है। पर्याप्त वर्षा होने से किसानों को समय पर बुवाई करने में मदद मिलती है, जलाशयों और तालाबों का जलस्तर बढ़ता है तथा भूजल का स्तर भी बेहतर होता है। वहीं, लगातार गर्मी और उमस से परेशान शहरों के लोगों के लिए यह बारिश राहत लेकर आने वाली है।