प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड के स्थापना दिवस के अवसर पर राज्यवासियों को शुभकामना संदेश दिया। उन्होनें अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा, ‘उत्तराखंड की स्थापना की 25वीं वर्षगांठ पर राज्य के मेरे सभी भाई-बहनों को अनेकानेक शुभकामनाएं। प्रकृति की गोद में बसी हमारी यह देवभूमि आज पर्यटन के साथ-साथ हर क्षेत्र में प्रगति की नई रफ्तार भर रही है। प्रदेश के इस विशेष अवसर पर मैं यहां के विनम्र, कर्मठ और देवतुल्य लोगों की सुख-समृद्धि, सौभाग्य और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं’
यह दिवस हर साल उस दिन को याद करते हुये मनाया जाता है, जब साल 2000 में यह राज्य बना था। देश के उत्तरी हिस्से में स्थित यह राज्य अपनी समृद्ध संस्कृति और परंपराओं के लिए जाना जाता है। 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश से अलग करके उत्तराखंड को भारत का 27वां राज्य बना गया। जो 2 मंडलों में विभाजित है- गढवाल और कुमाऊं। जहां गढवाल मंडल में उत्तरकाशी, चमोली, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, टिहरी, देहरादून और हरिद्वार को मिलाकर 7 जिले हैं जबकि कुमाऊं मंडल में उधम सिंह नगर, नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ, चंपावत और बागेश्वर को मिलाकर 6 जिले हैं।
यह दिन राज्य की उस यात्रा का प्रतीक है जो 25 साल पहले शुरू हुआ, जब उत्तर प्रदेश के पहाड़ी इलाकों को अलग करके एक नया राज्य बनाया गया, ताकि वहां के लोग अपने विकास की दिशा खुद तय कर सकें। राज्य के लोग इस दिन अपने अतीत के उन कठिन दिनों को याद करते हैं जब उन्होंने अलग राज्य की मांग की और उस प्रगति को भी जो उन्होंने अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखते हुए हासिल किया है।
हर साल इस दिन राज्य के लोग अपने अतीत के उस कठिन समय को याद करते हैं, जब उन्होंने अलग राज्य की मांग की और उस प्रगति को जो उन्होंने अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखते हुए हासिल किया। यह दिन राज्य की आध्यात्मिक शक्ति और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन का भी प्रतीक है। उत्तराखंड आज भी प्रकृति प्रेमियों और आध्यात्मिक शांति की तलाश करने वालों के लिए स्वर्ग के समान है। यह दिन राज्य की उस परंपरा को भी उजागर करता है जिसमें हिमालय की शांति और पवित्रता को संजोने के साथ-साथ केदारनाथ, बद्रीनाथ जैसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों की आस्था को बनाए रखा गया है।
सबसे पहले कौन क्या?
उत्तराखंड के सबसे पहले मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी थे। वे भारतीय जनता पार्टी के सदस्य थे। उन्होंने 09 नवंबर 2000 से 29 अक्टूबर 2001 तक इस पद पर काम किया। राज्य के पहले राज्यपाल के तौर पर सुरजीत सिंह बरनाला ने पदभार संभाला था। राज्य के पहले पुलिस महानिदेशक के तौर पर अशोक कांत शरण ने जिम्मेदारी संभाली थी।