नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने बुधवार को अपने कार्गो ऑपरेशन की औपचारिक शुरुआत कर दी। घरेलू यात्री उड़ानों के बाद अब एयरपोर्ट से पहली घरेलू कार्गो फ्लाइट का सफल संचालन किया गया, जिसे क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। विमान के आगमन पर वाटर कैनन से सलामी देकर उसका भव्य स्वागत किया गया।
इस पहले कार्गो ऑपरेशन में एफ्कॉम होल्डिंग्स की बोइंग 737-800 एफ ने चेन्नई-नोएडा-चेन्नई रूट पर उड़ान भरी। विमान लगभग 20 टन मिश्रित कार्गो लेकर नोएडा पहुंचा, जिसमें खाद्य पदार्थ, ऑटोमोबाइल स्पेयर पार्ट्स, मोबाइल डिवाइस और कंसोलिडेशन शिपमेंट शामिल थे। लोडिंग और अनलोडिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद विमान को वापस चेन्नई के लिए रवाना कर दिया गया।
मल्टी-मॉडल कार्गो हब की शुरुआत
एयर इंडिया सेट्स द्वारा भारत के पहले एकीकृत मल्टी-मॉडल कार्गो हब से माल ढुलाई का कार्य शुरू किया गया है। यह कदम भारत के लॉजिस्टिक्स सेक्टर में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। एयरपोर्ट की प्रारंभिक कार्गो क्षमता 1.2 मिलियन मीट्रिक टन तय की गई है, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 2.5 मिलियन मीट्रिक टन करने की योजना है।
किसानों और व्यापारियों को मिलेगा सीधा फायदा
नोएडा, ग्रेटर नोएडा और पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उद्योगों की बड़ी संख्या को देखते हुए यह कार्गो सेवा व्यापारियों, किसानों और निर्यातकों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी। अब उत्पादों को देश और विदेश के बाजारों तक तेजी से और कम लागत में पहुंचाया जा सकेगा। इससे निर्यात को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
लीची और कृषि उत्पादों की भी हुई ढुलाई
इस पहली कार्गो उड़ान में पठानकोट से आई ताजी लीची को चेन्नई भेजा गया, जबकि बेंगलुरु से कुछ ऑटोमोबाइल स्पेयर पार्ट्स जेवर एयरपोर्ट पहुंचे। यह संकेत है कि आने वाले समय में कृषि उत्पादों से लेकर औद्योगिक सामान तक यहां से बड़े पैमाने पर निर्यात और परिवहन संभव होगा।
वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़ाव की दिशा में कदम
यह कार्गो सेवा उत्तर प्रदेश को वैश्विक सप्लाई चेन से जोड़ने की दिशा में एक अहम पहल मानी जा रही है। एयरपोर्ट से आने वाले समय में बैंकॉक, कोलंबो, दुबई, हनोई और अन्य अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के लिए भी कार्गो सेवाओं के विस्तार की संभावना जताई जा रही है।
भविष्य की संभावनाएं
एयरपोर्ट प्रबंधन के अनुसार, जुलाई से नियमित कार्गो उड़ानों का विस्तार किया जाएगा। इससे दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पर कार्गो का दबाव कम होगा और उत्तर भारत में लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को नई मजबूती मिलेगी। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का यह कदम न केवल क्षेत्रीय विकास को गति देगा, बल्कि किसानों, एमएसएमई और निर्यात उद्योगों के लिए नए अवसर भी पैदा करेगा।