उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में एक दर्दनाक सड़क हादसे के बाद उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब युवक की मौत से गुस्साए परिजनों ने हाईवे जाम कर दिया। आरोप है कि मौके पर पहुंचे एक दरोगा ने हादसे को लेकर ऐसी कथित संवेदनहीन टिप्पणी कर दी, जिसने लोगों के आक्रोश को और भड़का दिया। मामले ने तूल पकड़ा तो पुलिस प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा और संबंधित उपनिरीक्षक को लाइन हाजिर कर दिया गया।
घटना तिलहर थाना क्षेत्र के पूर्वी भक्सी तिराहा की है। यहां रुजवारी गांव निवासी 25 वर्षीय अंशुल पांडेय शनिवार सुबह अपनी बहन डॉली पांडेय को बाइक से बस स्टॉप तक छोड़ने पहुंचे थे। बहन को छोड़ने के बाद वह सड़क किनारे अपनी बाइक के पास खड़े थे। इसी दौरान बरेली की ओर से शाहजहांपुर आ रही एक कार अचानक अनियंत्रित हो गई और अंशुल को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार अंशुल और उनकी बाइक को रौंदते हुए पास खड़ी दूसरी कार से जा भिड़ी।
हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने गंभीर रूप से घायल अंशुल को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। युवक की मौत की खबर मिलते ही परिवार और गांव में मातम पसर गया। देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन मौके पर पहुंच गए।
गुस्साए लोगों ने दुर्घटना में शामिल कार को सड़क के बीचों-बीच खड़ा कर बरेली-शाहजहांपुर हाईवे पर जाम लगा दिया। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि कार चला रही महिला डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। हालात को देखते हुए पुलिस ने महिला चालक को हिरासत में लेकर मेडिकल जांच के लिए अस्पताल भेज दिया, लेकिन इससे भी परिजन संतुष्ट नहीं हुए।

इसी दौरान विवाद ने नया मोड़ ले लिया। परिजनों का आरोप है कि मौके पर मौजूद उपनिरीक्षक जोगेंद्र ने कहा कि “कीड़े-मकोड़े तो रोज मरते हैं।” मृतक के परिजनों और ग्रामीणों ने इस कथित टिप्पणी को बेहद अपमानजनक बताते हुए पुलिस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग शुरू कर दी। देखते ही देखते माहौल और अधिक गर्म हो गया तथा पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक होने लगी।
स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। एसडीएम और क्षेत्राधिकारी ने परिजनों से बातचीत कर निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा दिया। करीब एक घंटे तक चला जाम अधिकारियों के आश्वासन के बाद समाप्त हुआ। बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने संबंधित उपनिरीक्षक को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया।
मृतक अंशुल पांडेय बीएससी के छात्र थे और परिवार की उम्मीदों का केंद्र माने जाते थे। उनकी असमय मौत से माता-पिता, बहनों और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार का कहना है कि अंशुल केवल अपनी बहन को बस में बैठाने गए थे और कुछ ही मिनटों में उनकी जिंदगी समाप्त हो गई।
पुलिस के अनुसार, मृतक के पिता की तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और दुर्घटना की जांच जारी है। वहीं कार चला रही डॉक्टर अंकिता, जो शाहजहांपुर के एक निजी मेडिकल कॉलेज में कार्यरत हैं, को बाद में शांति भंग की आशंका के तहत एसडीएम कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जमानत मिल गई।
फिलहाल यह मामला सड़क हादसे से आगे बढ़कर पुलिस की कार्यशैली और संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े कर रहा है। युवक की मौत और दरोगा की कथित टिप्पणी को लेकर इलाके में चर्चा का माहौल बना हुआ है, जबकि परिजन दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं।