Belagavi में साइबर अपराध का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां 81 वर्षीय एक उद्योगपति से ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर 15.45 करोड़ रुपये हड़प लिए। इसे राज्य के सबसे बड़े साइबर फ्रॉड मामलों में से एक माना जा रहा है।
CBI अधिकारी बनकर किया संपर्क
साइबर अपराधियों ने खुद को Central Bureau of Investigation (CBI) का अधिकारी बताकर बुजुर्ग कारोबारी से संपर्क किया। उन्होंने दावा किया कि वह मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच के दायरे में हैं और उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” में रखा गया है।
एक महीने तक चलता रहा दबाव
ठगों ने 7 फरवरी से 9 मार्च के बीच लगातार फोन और ऑनलाइन माध्यम से संपर्क बनाए रखा। इस दौरान उन्होंने कारोबारी को डराया-धमकाया और जांच में सहयोग के नाम पर कई बार पैसे ट्रांसफर करवाए।
कई किस्तों में वसूले करोड़ों रुपये
आरोपियों ने अलग-अलग खातों में रकम भेजने को कहा और धीरे-धीरे कुल 15.45 करोड़ रुपये निकाल लिए। जब तक पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
‘डिजिटल अरेस्ट’ क्या होता है?
हाल के समय में साइबर अपराधी इस नई चाल का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे खुद को पुलिस, CBI या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल या फोन पर व्यक्ति को “नजरबंद” जैसा माहौल बनाकर डराते हैं और बैंक विवरण या पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।
जांच शुरू, लोगों से सतर्क रहने की अपील
मामला सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, सरकारी कार्रवाई या धन ट्रांसफर के दबाव पर तुरंत स्थानीय पुलिस से संपर्क करें।