नई दिल्ली, मार्च 2026 भारतीय शेयर बाजार के बेंचमार्क सूचकांक निफ्टी 50 पर इन दिनों भारी दबाव बना हुआ है। वैश्विक अनिश्चितता, पश्चिम एशिया संकट और कच्चे तेल की उछलती कीमतों के बीच बाजार में व्यापक बिकवाली देखी जा रही है। 5 जनवरी 2026 को 26,373.2 के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचे निफ्टी 50 ने 9 मार्च को 23,697 का इंट्राडे लो छुआ, जो अपने शिखर से करीब 10.1 प्रतिशत की गिरावट है। बाजार विशेषज्ञ इसे ‘टेक्निकल करेक्शन’ की श्रेणी में रख रहे हैं।
क्या होता है टेक्निकल करेक्शन?
शेयर बाजार की भाषा में टेक्निकल करेक्शन तब माना जाता है जब कोई सूचकांक या शेयर अपने हालिया उच्चतम स्तर से 10 प्रतिशत या उससे ज्यादा नीचे आ जाए। यह किसी मजबूत तेजी के बाद आने वाली एक स्वाभाविक और अपेक्षित गिरावट होती है। इसका यह मतलब नहीं होता कि बाजार में लंबे समय के लिए मंदी आ गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार करेक्शन बाजार के सामान्य चक्र का हिस्सा होते हैं। जब वैल्यूएशन बहुत ऊंचे हो जाते हैं, वैश्विक जोखिम बढ़ता है या निवेशक लंबी तेजी के बाद मुनाफावसूली करने लगते हैं तो ऐसी गिरावट देखने को मिलती है।
व्यापक बिकवाली का असर
हाल की गिरावट पूरे बाजार में एक साथ देखी जा रही है। 5 जनवरी के उच्चतम स्तर से अब तक निफ्टी के 50 शेयरों में से केवल 13 शेयरों ने ही पॉजिटिव रिटर्न दिया है जबकि 37 शेयर नुकसान में हैं। इनमें से करीब 22 शेयर अपने जनवरी के उच्च स्तर से 10 प्रतिशत या उससे ज्यादा गिर चुके हैं। सात शेयर तो 20 प्रतिशत से भी अधिक टूट गए हैं, जिसे व्यक्तिगत शेयरों के लिहाज से बेयर मार्केट टेरिटरी माना जाता है।
43 लाख करोड़ की संपत्ति स्वाहा
इस गिरावट ने निवेशकों की जेब पर जबरदस्त चोट की है। BSE पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 5 जनवरी के बाद से करीब 43 लाख करोड़ रुपये घट गया है। यह आंकड़ा इस बात का गवाह है कि यह गिरावट कितनी गहरी और व्यापक रही है।
वैश्विक कारण भी जिम्मेदार
मौजूदा करेक्शन के पीछे घरेलू कारणों के साथ-साथ वैश्विक कारक भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध, होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग बाधा और कच्चे तेल के 100 डॉलर प्रति बैरल पार कर जाने से वैश्विक बाजारों में रिस्क-ऑफ सेंटिमेंट हावी है। इन सबके चलते विदेशी और घरेलू निवेशक दोनों सतर्क रवैया अपनाए हुए हैं।
दीर्घकालिक निवेशकों के लिए क्या करें?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक निवेशकों के लिए करेक्शन का यह दौर अक्सर अच्छे शेयरों में निवेश का अवसर लेकर आता है। हालांकि अल्पकालिक अस्थिरता तब तक बनी रह सकती है जब तक वैश्विक अनिश्चितताएं कम नहीं होतीं। ऐसे में घबराहट में बिकवाली करने की बजाय धैर्य बनाए रखना और मजबूत बुनियादी वाले शेयरों पर ध्यान केंद्रित करना ही समझदारी होगी।