“अगर 18 दिन और इंतजार करते…” ट्रंप टैरिफ फैसले के बाद कांग्रेस का मोदी सरकार पर बड़ा हमला, भारत-अमेरिका डील पर उठाए गंभीर सवाल

Vin News Network
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कांग्रेस ने कहा—जल्दबाजी में हुआ भारत-अमेरिका व्यापार समझौता।

अमेरिका में टैरिफ को लेकर आए बड़े कानूनी फैसले के बाद भारत की राजनीति भी गरमा गई है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि भारत ने जल्दबाजी में अमेरिका के साथ ऐसा व्यापार समझौता कर लिया, जो देश के हितों के खिलाफ जा सकता है।

कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इस मुद्दे पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर भारत थोड़ा और इंतजार करता, तो उसे इस तरह के समझौते में नहीं फंसना पड़ता। उनका कहना है कि अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट द्वारा डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ को रद्द किए जाने से पहले ही भारत ने जल्दबाजी में निर्णय ले लिया।

खेड़ा ने दावा किया कि 2 फरवरी को भारत सरकार ने अमेरिका के साथ एक ट्रेड फ्रेमवर्क पर सहमति जताई थी, जिसमें भारतीय निर्यात पर टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने की बात शामिल थी। उन्होंने इस फैसले को ‘एकतरफा’ और ‘भारत विरोधी’ करार दिया।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस दिन देर रात वॉशिंगटन को फोन क्यों किया। खेड़ा के मुताबिक, अगर भारत सिर्फ 18 दिन और इंतजार कर लेता, तो अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद स्थिति पूरी तरह बदल सकती थी और भारत बेहतर शर्तों पर बातचीत कर सकता था।

सोशल मीडिया पर भी उन्होंने सरकार की रणनीति पर सवाल उठाते हुए लिखा कि भारत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक इंतजार करने की अपनी शुरुआती योजना क्यों छोड़ दी। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि इसके पीछे कई अन्य कारण हो सकते हैं, जिनमें अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय और राजनीतिक पहलू शामिल हैं।

कांग्रेस ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि यह फैसला दिखाता है कि अमेरिका में संस्थागत संतुलन अभी भी मजबूत है। उन्होंने 6-3 के फैसले को निर्णायक बताते हुए कहा कि न्यायपालिका ने संविधान के दायरे में रहकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।

दरअसल, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए वैश्विक टैरिफ को असंवैधानिक ठहराते हुए रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि कर लगाने का अधिकार, जिसमें टैरिफ भी शामिल हैं, स्पष्ट रूप से अमेरिकी कांग्रेस के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास। इस फैसले को ट्रंप की आर्थिक नीतियों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने जल्दबाजी में फैसला लिया, जबकि सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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