होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान ने जहाजों के लिए एक नई सलाह जारी की है. ईरान का कहना है कि इस समुद्री रास्ते के कुछ हिस्सों में समुद्री सुरंगें यानी माइंस हो सकती हैं जिनसे जहाजों को खतरा है. इसी वजह से जहाजों को अब पुराने रास्तों के बजाय नए रास्तों से जाने को कहा गया है. यह फैसला तब आया है जब दो हफ्ते के युद्धविराम के बाद इस रास्ते को फिर से खोलने की बात हुई है.
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने साफ किया है कि जहाजों को सुरक्षा के लिहाज से तय किए गए नए रूट का ही पालन करना होगा. इसका मकसद व्यापारिक जहाजों को संभावित धमाकों से बचाना है. आईआरजीसी ने जहाजों से यह भी कहा है कि वे इस इलाके से गुजरते समय ईरानी नौसेना के साथ तालमेल बनाए रखें. नई योजना के हिसाब से जो जहाज ओमान सागर से खाड़ी की तरफ आ रहे हैं उन्हें लारक द्वीप के उत्तर से जाना होगा. वहीं जो जहाज खाड़ी से बाहर निकल रहे हैं उन्हें द्वीप के दक्षिण वाले रास्ते का इस्तेमाल करना होगा.
अमेरिका और ईरान के बीच इस दो हफ्ते के युद्धविराम को कराने में पाकिस्तान ने बिचौलिये की भूमिका निभाई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जानकारी दी है कि ईरान इस बात पर राजी हो गया है कि वह तेल और गैस की सप्लाई के लिए इस रास्ते को खोल देगा. दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है. पिछले करीब डेढ़ महीने से चल रहे संघर्ष के बाद उम्मीद है कि शुक्रवार तक यह रास्ता आंशिक रूप से खुल जाएगा. हालांकि इस दौरान ईरान की कड़ी निगरानी बनी रहेगी.
इस समझौते के बीच एक चर्चा जहाजों से वसूले जाने वाले शुल्क यानी टोल को लेकर भी हो रही है. ईरान का संकेत है कि वह भविष्य में यहां से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स लगा सकता है. हालांकि ओमान ने इस बात का विरोध किया है. ओमान का कहना है कि इस तरह का टैक्स वसूलना पुराने अंतरराष्ट्रीय समझौतों के खिलाफ होगा. कुछ खबरों में दावा किया जा रहा है कि यह टैक्स सिस्टम लागू हो चुका है तो कुछ इसे अभी सिर्फ एक प्रस्ताव मान रही हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी इस पर बात करते हुए कहा है कि अमेरिका जहाजों पर शुल्क लगाने की एक संयुक्त व्यवस्था बनाने पर विचार कर सकता है.