लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने गुरुवार को स्टांप एवं पंजीकरण विभाग की समीक्षा बैठक में कई अहम फैसले लिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की कि अब भूतपूर्व सैनिकों और दिव्यांगजनों को भी महिलाओं की तरह स्टांप शुल्क में छूट का लाभ मिलेगा। इसके अलावा, मकान या दुकान किराए पर लेने वालों के लिए भी राहत का ऐलान किया गया है। अब रेंट एग्रीमेंट पर लगने वाले शुल्क में भी छूट दी जाएगी।
सीएम योगी ने स्पष्ट कहा कि सरकार का उद्देश्य न केवल आम जनता को सुविधा देना है बल्कि रजिस्ट्री प्रक्रिया को पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त बनाना भी है। इसी दिशा में अब संपत्तियों की रजिस्ट्री में आधार प्रमाणीकरण को लागू किया जाएगा। इससे फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी और वास्तविक खरीदार-बिक्री करने वालों की पहचान सुनिश्चित होगी।
महिलाओं की तरह भूतपूर्व सैनिकों और दिव्यांगजनों को लाभ
मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि राज्य सरकार ने अब तक महिलाओं को स्टांप शुल्क में छूट का लाभ दिया था। अब इसमें भूतपूर्व सैनिकों और दिव्यांगजन को भी शामिल किया जा रहा है। इसका सीधा फायदा उन लोगों को मिलेगा जो अपनी पेंशन या सीमित आय में परिवार की जरूरतें पूरी करते हैं। दिव्यांगजन और सैनिकों के लिए यह कदम सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में बड़ा निर्णय माना जा रहा है।
रेंट एग्रीमेंट पर भी छूट
किराए पर रहने वाले लाखों लोगों के लिए भी यह फैसला बड़ी राहत लेकर आया है। अब मकान या दुकान किराए पर लेने वालों को रेंट एग्रीमेंट कराने पर कम शुल्क देना होगा। इस फैसले से शहरी और कस्बाई क्षेत्रों में किराए पर रहने वाले परिवारों को सीधा लाभ होगा। रजिस्ट्री में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए आधार प्रमाणीकरण, उत्तर प्रदेश में संपत्ति रजिस्ट्री में अब आधार कार्ड का प्रमाणीकरण अनिवार्य किया जाएगा। इससे फर्जी नाम, बोगस खरीदार और गलत पते पर होने वाली रजिस्ट्री की संभावना खत्म होगी। जिन मामलों में बिचौलियों और दलालों की भूमिका होती थी, उस पर भी रोक लगेगी। सरकार का मानना है कि आधार प्रमाणीकरण से पारदर्शिता बढ़ेगी और विवादित संपत्ति के मामले घटेंगे।
सिंगल विंडो से ई-पंजीकरण सुविधा
सीएम योगी ने विकास प्राधिकरणों के आवंटियों की संपत्ति के लिए सिंगल विंडो से ई-पंजीकरण की सुविधा शुरू करने का निर्देश दिया। इस कदम से आम लोगों को रजिस्ट्री कराने के लिए बार-बार चक्कर नहीं लगाने होंगे। डिजिटल सिस्टम के ज़रिए घर बैठे ऑनलाइन रजिस्ट्री कराई जा सकेगी। इससे समय और पैसे दोनों की बचत होगी। ई-भुगतान को बनाया जाएगा अनिवार्य, मुख्यमंत्री ने कहा कि पांच जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के सफल होने के बाद अब यह व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू होगी। अब 20 हजार रुपये से अधिक के निबंधन शुल्क के लिए ई-भुगतान अनिवार्य होगा। इस कदम से नकद लेनदेन में होने वाले गड़बड़ी और भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी। साथ ही सरकार की आय पारदर्शी तरीके से दर्ज होगी। सरकार का बड़ा लक्ष्य: पारदर्शिता और जनता को राहत, योगी आदित्यनाथ ने साफ किया कि सरकार की प्राथमिकता दो स्तरों पर है: जनता को अधिक से अधिक राहत देना। पंजीकरण प्रक्रिया को आधुनिक और पारदर्शी बनाना।
सरकार का मानना है कि अगर पंजीकरण और शुल्क प्रक्रिया सरल होगी तो लोग आसानी से संपत्ति की खरीद-फरोख्त कर पाएंगे। इससे न केवल जनता का विश्वास बढ़ेगा बल्कि सरकार की राजस्व आय में भी इजाफा होगा।
विपक्ष की प्रतिक्रिया और जनता की उम्मीदें
इस फैसले के बाद आम जनता और सामाजिक संगठनों ने राहत की सांस ली है। भूतपूर्व सैनिकों के संगठन ने कहा कि यह फैसला उन्हें सामाजिक सम्मान दिलाने वाला है। दिव्यांगजन ने सरकार के इस कदम को जीवन आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम बताया। हालांकि, विपक्षी दलों ने कहा कि सरकार को यह योजना पहले ही लागू करनी चाहिए थी और अब इसे पूरी तरह जमीनी स्तर पर लागू करना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
आगे का रास्ता
इन नए प्रावधानों के लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश डिजिटल पंजीकरण के क्षेत्र में एक मॉडल बन सकता है। यदि आधार प्रमाणीकरण और ई-भुगतान की प्रक्रिया सफल रही, तो अन्य राज्य भी इसे अपनाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन हो जाएगी, जिससे लोगों को भ्रष्टाचार और दलाली से छुटकारा मिलेगा।