सूखे की मार से परेशान किसान क्या उगाएं? कम पानी में अच्छी पैदावार देने वाली इन फसलों पर दें ध्यान

Vin News Network
Vin News Network
5 Min Read
सूखे जैसे हालात में फसल का सही चुनाव जरूरी

विन न्यूज़ नेटवर्क। देश के कई हिस्सों में बारिश की कमी और लंबे समय तक सूखे जैसे हालात खेती के लिए चुनौती बन रहे हैं। खेतों में पर्याप्त नमी नहीं होने से फसलों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है, वहीं सिंचाई के लिए पानी की कमी किसानों की चिंता बढ़ा रही है।

ऐसे में किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि कम पानी में कौन-सी फसल उगाई जाए, जिससे नुकसान का जोखिम कम किया जा सके। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे हालात में स्थानीय मौसम, मिट्टी की प्रकृति और उपलब्ध पानी को ध्यान में रखकर फसल का चयन करना जरूरी है।

बाजरा और ज्वार की खेती हो सकती है बेहतर विकल्प

कम बारिश वाले क्षेत्रों में बाजरा और ज्वार जैसी मोटे अनाज की फसलें उपयोगी विकल्प हो सकती हैं। इन फसलों की कई किस्में गर्मी और सीमित नमी की परिस्थितियों को दूसरी अधिक पानी मांगने वाली फसलों की तुलना में बेहतर सहन कर सकती हैं।

बाजरे की खेती विशेष रूप से राजस्थान, गुजरात और हरियाणा के शुष्क तथा अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में की जाती है। वहीं, ज्वार भी कम वर्षा वाले क्षेत्रों में उगाई जाने वाली प्रमुख फसलों में शामिल है। हालांकि, अच्छी पैदावार के लिए सही किस्म, बुवाई का समय और फसल की शुरुआती अवस्था में पर्याप्त नमी जरूरी है। किसानों को अपने क्षेत्र के अनुसार उपयुक्त बीज का चयन करना चाहिए।

अरहर, मूंग और उड़द से भी मिल सकता है फायदा

दलहन फसलें भी सीमित पानी की स्थिति में किसानों के लिए विकल्प बन सकती हैं। अरहर, मूंग और उड़द की उपयुक्त किस्में कई क्षेत्रों में कम सिंचाई के साथ उगाई जा सकती हैं। इन फसलों से दाल उत्पादन के साथ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी मदद मिलती है। दलहनी फसलें अपनी जड़ों में रहने वाले सूक्ष्मजीवों की सहायता से वायुमंडलीय नाइट्रोजन को मिट्टी में उपलब्ध कराने में योगदान देती हैं।

हालांकि, इन फसलों की पानी की जरूरत उनकी किस्म, मिट्टी और मौसम पर निर्भर करती है। इसलिए बुवाई से पहले स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से सलाह लेना बेहतर रहेगा।

तिल और मूंगफली भी हो सकते हैं विकल्प

कम बारिश वाले कुछ क्षेत्रों में तिल की खेती उपयोगी साबित हो सकती है। इसकी कई किस्में कम अवधि में तैयार हो जाती हैं। दूसरी ओर, मूंगफली भी किसानों के लिए विकल्प है, लेकिन इसके लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी और फसल की जरूरत के अनुसार पानी उपलब्ध होना जरूरी है। इसलिए केवल कम पानी की जरूरत के आधार पर किसी फसल का चयन करना सही नहीं होगा।

खेत की नमी बचाने के लिए अपनाएं ये उपाय

सूखे जैसी परिस्थितियों में फसल का चुनाव करने के साथ खेत में मौजूद नमी को बचाना भी महत्वपूर्ण है। इसके लिए किसान खेत में फसल के अवशेषों का उपयोग कर सकते हैं, जिससे मिट्टी से पानी का वाष्पीकरण कम करने में मदद मिलती है। समय पर बुवाई, खरपतवार नियंत्रण और जरूरत के अनुसार सिंचाई भी फसल को नुकसान से बचाने में सहायक हो सकती है।

किसानों को कम अवधि में तैयार होने वाली सूखा सहनशील किस्मों की जानकारी भी लेनी चाहिए। यदि मानसून में देरी हो या बारिश बीच में रुक जाए, तो कृषि विभाग की सलाह के अनुसार वैकल्पिक फसल योजना अपनाई जा सकती है।

बुवाई से पहले कृषि विशेषज्ञों से लें सलाह

हर क्षेत्र की मिट्टी, तापमान और बारिश का पैटर्न अलग होता है। इसलिए एक ही फसल सभी किसानों के लिए उपयुक्त नहीं हो सकती। बीज खरीदने और बुवाई करने से पहले स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करना चाहिए। सही फसल, उपयुक्त किस्म और पानी के बेहतर प्रबंधन के जरिए किसान सूखे के जोखिम को कम करने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने की दिशा में कदम उठा सकते हैं।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *