बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को पिछले वर्ष हुए जुलाई विद्रोह और मानवता विरोधी अपराधों के लिए मौत की सजा सुनाई है। निर्णय के अनुसार, हसीना पर उग्र विरोध प्रदर्शन के दौरान निर्दोष नागरिकों पर गोली चलवाने का आरोप सिद्ध माना गया है। अभी वे भारत में रह रही हैं, ऐसे में उनकी गिरफ्तारी को लेकर दोनों देशों के बीच प्रक्रियात्मक कदम अहम हो जाते हैं।
अदालत ने हसीना के खिलाफ 453 पन्नों का विस्तृत फैसला जारी किया है, जिसमें उन्हें कई गंभीर आरोपों मानव अधिकारों के उल्लंघन, सत्ता का दुरुपयोग और विरोध को बलपूर्वक दबाने का दोषी बताया गया है। इसी मामले में पूर्व गृह मंत्री असदुज्जामान खान को भी मृत्युदंड मिला है, जबकि पूर्व पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून को पाँच वर्ष की सजा सुनाई गई है।
अब बड़ा सवाल यह है कि भारत में मौजूद हसीना की गिरफ्तारी कैसे संभव होगी। बांग्लादेश सरकार इंटरपोल के माध्यम से ‘रेड कॉर्नर नोटिस’ जारी करने की तैयारी में है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गिरफ्तारी की कार्रवाई को आगे बढ़ाने का तरीका है। इंटरपोल का यह नोटिस सभी सदस्य देशों की पुलिस एजेंसियों को सतर्क करता है, ताकि आरोपी को हिरासत में लिया जा सके।
क्योंकि हसीना भारत में हैं इसलिए नोटिस जारी होने के बाद बांग्लादेश भारत को विधिवत सूचना देगा और सहयोग की मांग करेगा। आगे की प्रक्रिया में भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। यदि भारत गिरफ्तारी या प्रत्यर्पण के लिए सहमत नहीं होता, तो बांग्लादेश इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र तक ले जाकर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की कोशिश कर सकता है।