नेपाल में सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार के खिलाफ हिंसक विरोध – 20 की मौत, 347 घायल

प्रदर्शन काठमांडू से कई शहरों में फैला, संसद भवन में घुसकर तोड़फोड़

Vin News Network
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नेपाल की सड़कों पर युवा – ‘भ्रष्टाचार बंद करो, सोशल मीडिया नहीं
Highlights
  • 20 लोगों की मौत, 347 से अधिक घायल
  • कर्फ्यू, सेना तैनात, भारत-नेपाल सीमा पर अलर्ट
  • देर रात सरकार झुकी, सोशल मीडिया प्रतिबंध वापस

नेपाल में भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया बैन के खिलाफ युवाओं का आक्रोश आखिरकार हिंसा में बदल गया। राजधानी काठमांडू में प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन परिसर में घुसकर जमकर नारेबाजी और तोड़फोड़ की। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में 20 लोगों की मौत हो गई जबकि 347 से अधिक घायल हो गए।

पुलिस को हालात काबू में करने के लिए पानी की बौछार, डंडे और रबर की गोलियों का इस्तेमाल करना पड़ा। देर रात तक हालात बेकाबू रहे, जिसके बाद कई शहरों में कर्फ्यू लगा दिया गया और सेना तैनात करनी पड़ी।

विरोध पूरे नेपाल में फैला
भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया बैन के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन सिर्फ काठमांडू तक सीमित नहीं रहा। देखते-देखते यह आंदोलन पोखरा, बुटवल, भैरहवा, भरतपुर, इटाहारी और दमक तक फैल गया। हजारों स्कूल-कॉलेज के छात्र-छात्राएं सड़कों पर उतर आए। उनके हाथों में बैनर-पोस्टर थे, जिन पर लिखा था – “भ्रष्टाचार बंद करो, सोशल मीडिया नहीं”, “सोशल मीडिया पर पाबंदी हटाओ”, “युवा भ्रष्टाचार के खिलाफ”।

गृह मंत्री ने दिया इस्तीफा
स्थिति बिगड़ती देख नेपाल के गृह मंत्री रमेश लेखक ने देर रात इस्तीफा दे दिया। यह सरकार के भीतर दबाव और जनता के आक्रोश को दर्शाता है। इस्तीफे के तुरंत बाद सरकार ने सोशल मीडिया से प्रतिबंध हटाने का ऐलान किया। संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग ने बताया कि कैबिनेट की आपात बैठक में सोशल मीडिया साइट्स पर प्रतिबंध का फैसला वापस ले लिया गया है।

ओली सरकार पर दबाव
पीएम केपी शर्मा ओली ने भी घटनाओं के बाद अपना सुर बदला। उन्होंने बयान जारी कर कहा, “मैं जेन-जी पीढ़ी के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई दुखद घटना से बहुत दुखी हूं। हमें विश्वास था कि हमारे बच्चे शांतिपूर्वक अपनी मांगें रखेंगे, लेकिन निहित स्वार्थों के कारण आंदोलन में घुसपैठ हुई। इसका परिणाम नागरिकों की जान का नुकसान है… सरकार सोशल मीडिया के इस्तेमाल को रोकने के पक्ष में नहीं थी और इसके इस्तेमाल के लिए माहौल सुनिश्चित करेगी।” उन्होंने कहा कि अब 15 दिनों के भीतर एक जांच समिति रिपोर्ट देगी और ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

क्या है आक्रोश की वजह?
पिछले कुछ वर्षों में नेपाल में पीएम ओली की सरकार के मंत्रियों और अधिकारियों से जुड़े कई भ्रष्टाचार के मामलों की खबरें आई हैं। इन खबरों के बाद जनता के बीच गहरा आक्रोश पनप रहा था। इस बीच सरकार ने सोशल मीडिया साइट्स पर पाबंदी लगा दी, जिसे युवाओं ने अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला माना। सोशल मीडिया पर बैन ने आग में घी का काम किया। हजारों युवाओं ने काठमांडू की सड़कों पर उतरकर विरोध किया। इस दौरान माहौल इतना बिगड़ गया कि पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा।

भारत-नेपाल सीमा पर अलर्ट
नेपाल में बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत ने अपनी सीमा पर अलर्ट जारी किया है। सशस्त्र सीमा बल (SSB) को चौकसी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। भारतीय क्षेत्र में अशांति न फैले, इसके लिए आने-जाने वालों की कड़ी जांच की जा रही है। भारत-नेपाल के बीच 1,751 किलोमीटर लंबी खुली सीमा है।

संयुक्त राष्ट्र की चिंता
हिंसा में हुई मौतों और घायलों की खबर के बाद संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने भी चिंता जताई। यूएन ने निष्पक्ष व पारदर्शी जांच की मांग की है।

नारे बने आंदोलन की आवाज
छात्र-छात्राओं के हाथों में राष्ट्रीय ध्वज के साथ नारे लिखे बैनर-पोस्टर थे। “भ्रष्टाचार बंद करो, सोशल मीडिया नहीं” जैसे नारे पूरे नेपाल में गूंजने लगे। यूनिफॉर्म में सड़कों पर उतरे ये छात्र देश के भविष्य की तस्वीर पेश कर रहे थे।

नेपाल में युवाओं का आक्रोश दिखाता है कि अभिव्यक्ति की आज़ादी और पारदर्शी शासन की मांग अब और टाली नहीं जा सकती। देर रात सरकार का सोशल मीडिया बैन वापस लेना इस बात का संकेत है कि जनता की आवाज को नजरअंदाज करना मुश्किल है। अब सबकी नजरें 15 दिनों में आने वाली जांच समिति की रिपोर्ट पर होंगी, जो यह तय करेगी कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

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