मंगलवार को देश के 15वें उपराष्ट्रपति के चुनाव के लिए मतदान जारी है। इस चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन और भारतीय गठबंधन (विपक्ष) के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी के बीच सीधा मुकाबला है। भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को स्पष्ट बढ़त मिलने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन विपक्ष भी पूरे दमखम के साथ चुनावी मैदान में है।
कांग्रेस ने धनखड़ की चुप्पी पर उठाए सवाल
इसी बीच कांग्रेस पार्टी ने पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की चुप्पी को लेकर बड़ा सवाल खड़ा किया है। कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर लिखा, “पिछले 50 दिनों से धनखड़ ने असामान्य चुप्पी साध रखी है। आज जब उनके उत्तराधिकारी के लिए चुनाव प्रक्रिया चल रही है तो देश उनके अभूतपूर्व और अप्रत्याशित इस्तीफे के बाद उनके बयान का इंतजार कर रहा है।” जयराम रमेश ने यह भी कहा कि मोदी सरकार द्वारा किसानों की घोर उपेक्षा और सत्ता में बैठे लोगों के अहंकार से पैदा खतरों पर अपनी चिंता व्यक्त करने के बाद ही जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया था।
सचिन पायलट ने भी किया हमला
कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने भी पूर्व उपराष्ट्रपति की चुप्पी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “उपराष्ट्रपति चुनाव क्यों हो रहे हैं? पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ कहां हैं? एनडीए को चुनावों में अपना बहुमत साबित करने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी, क्योंकि भारतीय गठबंधन के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी बहुत मजबूत हैं। मुझे उम्मीद है कि नतीजे हमारे पक्ष में होंगे।”
धनखड़ का इस्तीफा और विवाद
ध्यान देने योग्य है कि जुलाई में जगदीप धनखड़ ने अचानक उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देकर सभी को चौंका दिया था। उनका इस्तीफा एक अभूतपूर्व और अप्रत्याशित कदम माना गया। इससे पहले उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर किसानों की उपेक्षा, सत्ता में बैठे लोगों के अहंकार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिति पर चिंता जताई थी। उनके इस्तीफे के बाद कई राजनीतिक दलों ने इसे लोकतंत्र की मजबूती के लिए ‘एक सशक्त संदेश’ बताया था। अब जब नए उपराष्ट्रपति के चुनाव हो रहे हैं, कांग्रेस धनखड़ की चुप्पी को एक बड़ा मुद्दा बना रही है और कह रही है कि देश उनके बयान का इंतजार कर रहा है।
एनडीए और विपक्ष में टक्कर
इस चुनाव में एनडीए के सी.पी. राधाकृष्णन और बी. सुदर्शन रेड्डी के बीच मुकाबला दिलचस्प माना जा रहा है। हालांकि संख्याबल के लिहाज से एनडीए को बढ़त है, लेकिन विपक्ष भी इस चुनाव को प्रतिष्ठा की लड़ाई बना रहा है।
सचिन पायलट का बयान इसी रणनीति की ओर इशारा करता है, जहां उन्होंने बी. सुदर्शन रेड्डी को “मजबूत उम्मीदवार” बताया और एनडीए को चेताया कि उन्हें अपना बहुमत साबित करने के लिए मेहनत करनी होगी।
धनखड़ की चुप्पी का राजनीतिक असर
पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ की चुप्पी ने एक नया राजनीतिक विमर्श खड़ा कर दिया है। कांग्रेस इसे सरकार के खिलाफ एक मुद्दे के रूप में इस्तेमाल कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि धनखड़ के अचानक इस्तीफे और उसके बाद की चुप्पी ने राजनीतिक हलकों में सवाल खड़े कर दिए हैं।
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि धनखड़ अगर अपनी चुप्पी तोड़ते हैं तो यह चुनावी माहौल में बड़ा असर डाल सकता है।
कांग्रेस की रणनीति
कांग्रेस पार्टी उपराष्ट्रपति चुनाव को सिर्फ एक संवैधानिक पद के लिए नहीं बल्कि नैतिक और राजनीतिक लड़ाई के तौर पर पेश कर रही है। पार्टी के नेताओं के बयान दिखाते हैं कि वे इस चुनाव को ‘मोदी सरकार की नीतियों’ के खिलाफ जनमत के रूप में भी देख रहे हैं।
जनता की निगाहें चुनाव और बयान पर
इस समय राजनीतिक हलकों में दो बड़े सवाल हैं –
- उपराष्ट्रपति चुनाव में कौन जीतेगा?
- जगदीप धनखड़ कब अपनी चुप्पी तोड़ेंगे?
- दोनों ही सवालों के जवाब आने वाले दिनों में स्पष्ट होंगे।
कांग्रेस के बयान और सवालों ने उपराष्ट्रपति चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है। धनखड़ की चुप्पी अब केवल व्यक्तिगत मामला नहीं रही, बल्कि यह चुनावी मुद्दा बन चुकी है। देखना यह होगा कि एनडीए इस चुनाव में अपनी बढ़त बनाए रख पाता है या विपक्ष का दावा असर दिखाता है।