विन न्यूज़ नेटवर्क। हरियाणा के नूंह जिले में एक मीट फैक्ट्री को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार जारी है। टपकन इलाके में गुरुवार को पांच गांवों के ग्रामीणों ने एकजुट होकर फैक्ट्री के खिलाफ प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का दावा है कि इस विरोध में करीब 30 हजार लोग शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों ने फैक्ट्री से फैल रही गंदगी, दुर्गंध और प्रदूषण के साथ-साथ पंचायत की जमीन पर रास्ते पर कथित कब्जे का मुद्दा भी उठाया।
फैक्ट्री बंद कराने और रास्ता खुलवाने की मांग
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने प्रशासन से मीट फैक्ट्री को बंद कराने, पंचायत के रास्ते पर हुए कथित अतिक्रमण को हटाने और रास्ते को दोबारा आम लोगों के लिए खोलने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि फैक्ट्री के आसपास रहने वाले लोगों को लंबे समय से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक, फैक्ट्री से आने वाली तेज बदबू और आसपास फैली गंदगी के कारण रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। उनका आरोप है कि खेती-किसानी के काम में भी दिक्कत आ रही है और क्षेत्र का वातावरण प्रभावित हुआ है।
प्रशासन से कई बार की गई शिकायत
टपकन के ग्रामीणों का कहना है कि, उन्होंने अपनी समस्याओं को लेकर प्रशासन के अधिकारियों से कई बार शिकायत की है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों के अनुसार, पंचायत की जमीन पर कथित अतिक्रमण से जुड़ा एक मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में भी लंबित है।
प्रदर्शन में शामिल सामाजिक कार्यकर्ता हिदायत खान ने फैक्ट्री में काम करने वाले कर्मचारियों के सत्यापन की मांग की। उनका कहना है कि वहां काम करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की पहचान और पृष्ठभूमि की पुलिस स्तर पर जांच होनी चाहिए।
करीब 12 साल से चल रही फैक्ट्री
हिदायत खान ने दावा किया कि संबंधित मीट फैक्ट्री करीब 12 वर्षों से संचालित हो रही है और इसके कारण टपकन के साथ आसपास के चार अन्य गांवों के लोगों को भी परेशानी हो रही है। हालांकि, इन आरोपों पर फैक्ट्री प्रबंधन या संबंधित पक्ष का पक्ष सामने आना बाकी है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि फैक्ट्री स्थापित किए जाने के समय स्थानीय लोगों को रोजगार देने की बात कही गई थी, लेकिन उनका कहना है कि उन्हें अपेक्षित रोजगार नहीं मिला।
नूंह में पहले भी उठ चुके हैं प्रदूषण के मुद्दे
मीट प्रोसेसिंग इकाइयों को लेकर नूंह जिले में पहले भी ग्रामीण विरोध कर चुके हैं। अगस्त में मंडीखेड़ा-नगीना क्षेत्र के लोगों ने एक अन्य मीट फैक्ट्री के खिलाफ प्रदर्शन किया था। ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि बिना उपचारित गंदा पानी, खून और अन्य अपशिष्ट खेतों की ओर छोड़े जा रहे हैं, जिससे फसलों और पशुओं पर असर पड़ रहा है। रावली गांव में भी स्थानीय बूचड़खानों के संचालन को लेकर पंचायत आयोजित की गई थी।
इसके बाद जलालपुर गांव में फेयर एक्सपोर्ट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की ओर से संचालित एक बूचड़खाने को हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शिकायत के बाद सील किया था। यह कार्रवाई कांग्रेस विधायक मामन खान की शिकायत के बाद हुई थी और मामले में कथित रूप से दूषित अपशिष्ट छोड़े जाने का मुद्दा भी सामने आया था।
जांच और कार्रवाई तक आंदोलन जारी रखने की बात
टपकन के ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगों में कथित अतिक्रमण हटाना, पंचायत का रास्ता खुलवाना और प्रदूषण संबंधी शिकायतों की जांच के बाद उचित कार्रवाई करना शामिल है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं पर ठोस कदम नहीं उठाया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।