काराकास: वेनेजुएला में आए दो शक्तिशाली भूकंपों ने पूरे देश को दहला दिया है। महज एक मिनट के अंतराल में आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के भूकंपों ने व्यापक तबाही मचाई है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में अब तक कम से कम 235 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1,500 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। राहत एजेंसियों का कहना है कि मृतकों की संख्या में और बढ़ोतरी हो सकती है क्योंकि कई लोग अब भी मलबे के नीचे फंसे हुए हैं।
भूकंप के कारण देशभर में करीब 250 इमारतें क्षतिग्रस्त या पूरी तरह ढह गई हैं। कई आवासीय और व्यावसायिक भवनों के गिरने से बड़ी संख्या में लोग मलबे में दब गए। अधिकारियों के अनुसार, लगभग 200 लोगों के अभी भी मलबे में फंसे होने की आशंका है। बचाव दल, सेना और स्थानीय स्वयंसेवक लगातार राहत कार्यों में जुटे हुए हैं तथा भारी मशीनों की मदद से लोगों को सुरक्षित निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
आपदा की गंभीरता को देखते हुए कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने सबसे अधिक प्रभावित ला गुआइरा क्षेत्र को आपदा क्षेत्र घोषित कर दिया है। उन्होंने बताया कि निजी कंपनियों से भारी निर्माण मशीनें और उपकरण मंगाए जा रहे हैं ताकि बचाव अभियान को तेज किया जा सके। सरकार ने सभी व्यवसायों और निर्माण कंपनियों से राहत कार्यों में सहयोग करने की अपील की है।
हालांकि, प्रभावित इलाकों के कई लोगों ने शिकायत की है कि सरकारी बचाव अभियान अपेक्षाकृत धीमा है। कई स्थानों पर स्थानीय निवासी अपने परिजनों और पड़ोसियों को बचाने के लिए अपने हाथों से मलबा हटाते दिखाई दिए। इस बीच, लापता लोगों की जानकारी जुटाने वाली एक वेबसाइट पर 46,000 से अधिक लोगों को लापता सूचीबद्ध किया गया है, हालांकि इस आंकड़े की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
भूकंप के कारण देश की आवश्यक सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। राजधानी काराकास और ला गुआइरा के हवाई अड्डों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। मेट्रो सेवाएं निलंबित हैं और कई स्कूलों को राहत शिविरों में बदल दिया गया है। कई इलाकों में बिजली और संचार सेवाएं भी बाधित हुई हैं, जिससे राहत कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी राहत और बचाव प्रयास तेज हो गए हैं। अमेरिका ने मानवीय सहायता के लिए 150 मिलियन डॉलर की सहायता राशि मंजूर की है और खोज एवं बचाव दलों के साथ सैन्य संसाधन भी भेजने की घोषणा की है। इसके अलावा मेक्सिको, कोलंबिया, स्पेन, फ्रांस, इटली, इक्वाडोर, पनामा और अल सल्वाडोर सहित कई देशों ने चिकित्सा दल, खोजी कुत्ते, राहत सामग्री और आपातकालीन उपकरण भेजने का आश्वासन दिया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस दुखद त्रासदी पर शोक व्यक्त करते हुए हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में राहत एवं बचाव अभियान के दौरान मृतकों और घायलों की संख्या में बदलाव हो सकता है। फिलहाल पूरे देश में आपातकालीन सेवाएं लोगों की जान बचाने और प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही हैं।