अमेरिका ने विदेशी कर्मचारियों के कामकाजी अधिकारों से जुड़ी एक अहम व्यवस्था बदल दी है जिससे बड़ी संख्या में वर्क-वीज़ा पर निर्भर पेशेवरों की स्थिति अस्थिर हो सकती है। गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने अब रोजगार-अधिकरण दस्तावेज़ (EAD) की ऑटोमेटिक एक्सटेंशन सुविधा को समाप्त कर दिया है नया नियम 30 अक्तूबर से लागू हो रहा है। इसके बाद, यदि किसी कर्मचारी का वर्क-परमिट समाप्त हो जाए और नवीनीकरण अभी तक मंजूर न हुआ हो तो अधिकार खत्म होते ही वह काम करना बंद करने के लिए बाध्य होगा।
पहले कानून के तहत नवीनीकरण लंबित होने पर कर्मचारी अपने पुराने परमिट की समाप्ति के बाद लगभग 540 दिन (करीब 18 महीने) तक काम जारी रख सकते थे अब यह सुरक्षा नहीं रहेगी। USCIS के आँकड़ों के हवाले से यह भी कहा गया है कि वर्क-परमिट के नवीनीकरण में 3 से 12 महीने तक लग सकते हैं इसलिए DHS ने कर्मचारियों को सलाह दी है कि वे अपने आवेदन वर्क-परमिट समाप्ति से कम से कम 180 दिन पहले जमा कर दें।
यह बदलाव खासकर भारतीय पेशेवरों के लिए गंभीर है अमेरिका में विदेशी कार्यबल का बड़ा हिस्सा भारतीयों से बनता है और इनमें H-1B वीजा धारक, H-4 वीजाधारक (जो वर्क-परमिट पर निर्भर हैं) तथा STEM क्षेत्रों के OPT पर काम कर रहे छात्र शामिल हैं। नियम बदलने से इन समूहों को अचानक रोजगारविहीनता, वीज़ा-स्थिति में अनिश्चितता और नौकरी से जुड़ी कानूनी जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है।
इसी बीच फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डीसैंटिस ने राज्य की यूनिवर्सिटी प्रशासनों को निर्देश दिया है कि वे H-1B या अन्य विदेशी वर्क-वीज़ा धारकों के स्थान पर पहले अमेरिकी नागरिकों को नियुक्त करने पर जोर दें। डीसैंटिस का कहना है कि कुछ संस्थान विदेशी कर्मचारियों को भर्ती कर रहे हैं जबकि योग्य अमेरिकी उम्मीदवार उपलब्ध है और वह ऐसे दुरुपयोग को रोकने के लिए कड़ा रुख अपनाएंगे आवश्यक होने पर शैक्षिक कार्यक्रमों की समीक्षा कर योग्य घरेलू स्नातकों की तैयारियों में सुधार करने को कहा जाएगा।
नतीजा यह है कि आने वाले समय में अमेरिकी वर्क-वीज़ा पर निर्भर लोगों को अधिक सतर्कता बरतनी पड़ेगी नवीनीकरण समय पर कराना, वैकल्पिक कानूनी मार्गो की जानकारी रखना और नियोक्ताओं के साथ आपातकालीन योजना बनाना अब जरूरी हो गया है।