डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव को कम करने के लिए दो हफ्तों के सीजफायर का ऐलान किया है. इस पर ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है. खामेनेई ने ईरान की सेना को तुरंत गोलीबारी रोकने का निर्देश दिया है. हालांकि उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि इसे युद्ध का अंत नहीं माना जाना चाहिए.
ईरान के सरकारी चैनल इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग पर एक आधिकारिक बयान पढ़ा गया है. इस बयान में खामेनेई ने कहा कि भले ही सभी सैन्य शाखाओं को गोलीबारी बंद करने का हुक्म दिया गया है लेकिन यह लड़ाई का पूरी तरह खात्मा नहीं है. खामेनेई के अनुसार सेना को सर्वोच्च नेता के आदेशों का पालन करना होगा और फिलहाल शांत रहना होगा. इसी बीच ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने भी एक बयान जारी किया है. परिषद ने अपनी बात दोहराते हुए कहा है कि सीजफायर का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि युद्ध खत्म हो गया है. उन्होंने चेतावनी दी है कि उनके सैनिकों के हाथ अभी भी ट्रिगर पर हैं. अगर दुश्मन की तरफ से कोई भी छोटी सी गलती या कार्रवाई होती है तो उसका जवाब पूरी ताकत के साथ दिया जाएगा.
दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस फैसले की जानकारी दी है. ट्रंप ने बताया कि वह ईरान पर होने वाले बमबारी और हमलों को अगले दो हफ्तों के लिए रोकने पर राजी हो गए हैं. उन्होंने इसे एक द्विपक्षीय युद्धविराम बताया है. ट्रंप ने यह भी कहा कि यह फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ हुई बातचीत के बाद लिया गया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बातचीत की वजह से ही फिलहाल सैन्य शक्ति के इस्तेमाल को रोका गया है. ट्रंप ने इसके लिए एक बड़ी शर्त भी रखी है.
इस शर्त के मुताबिक होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलना होगा और उसे सुरक्षित रखना होगा. ट्रंप ने यह जानकारी भी दी कि ईरान की तरफ से उन्हें दस बिंदुओं वाला एक प्रस्ताव मिला है. उन्हें लगता है कि यह प्रस्ताव आगे की बातचीत के लिए एक सही आधार बन सकता है. ट्रंप के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच पुराने समय से चले आ रहे लगभग सभी विवादित मुद्दों पर सहमति बन गई है. अभी स्थिति यह है कि दोनों देश एक दूसरे पर हमले न करने के लिए सहमत हुए हैं. ईरान ने अपनी सेना को पीछे हटने के लिए तो कह दिया है लेकिन वह अभी भी पूरी तरह सतर्क है.
अमेरिका की तरफ से भी यह साफ किया गया है कि यह विराम केवल दो हफ्तों की सीमित अवधि के लिए ही तय किया गया है. दोनों देशों के बीच आगे की बातचीत इसी प्रस्ताव के आधार पर होगी जो ईरान ने अमेरिका को भेजा है.