विन न्यूज़ नेटवर्क। उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर के बलिया दौरे से पहले राजनीतिक माहौल गरमा गया। गड़वार क्षेत्र में प्रस्तावित जनसभा से पहले समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और राजभर के खिलाफ नारेबाजी की।
राजभर का बयान बना विवाद की वजह
हाल ही में ओम प्रकाश राजभर ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा था कि अगर दम है तो लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव लड़ें और मैदान में आकर ताकत दिखाएं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी रंग का झंडा दिखा लिया जाए, लेकिन भगवा झंडा लहराता रहेगा। उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई थी। सपा कार्यकर्ताओं ने इसे चुनौती के रूप में लेते हुए विरोध प्रदर्शन का ऐलान कर दिया।

गड़वार में सपा कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन
सपा कार्यकर्ता राजभर का पुतला लेकर सड़क पर पहुंचे। उन्होंने राजभर गो बैक के नारे लगाए। काले झंडे दिखाकर विरोध जताया गया। पुतला फूंकने की कोशिश की गई। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बन गई। मौके पर मौजूद पुलिस बल ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप किया।
सपा नेता भानु दुबे हिरासत में
पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए सपा नेता भानु दुबे और उनके कुछ समर्थकों को हिरासत में ले लिया। अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के चलते यह कार्रवाई की गई। पुलिस सूत्र के मुताबिक, स्थिति को नियंत्रण में रखने और किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।
सुरक्षा के चलते बदला गया रूट
विरोध प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने ओम प्रकाश राजभर के कार्यक्रम में सुरक्षा बढ़ा दी। एहतियात के तौर पर मंत्री का निर्धारित मार्ग भी बदल दिया गया ताकि किसी तरह की बाधा या टकराव की स्थिति न बने।
राजभर बनाम सपा की बढ़ती तल्खी
कभी समाजवादी पार्टी के सहयोगी रहे ओम प्रकाश राजभर अब भाजपा गठबंधन का हिस्सा हैं। हाल के महीनों में उनके और अखिलेश यादव के बीच तीखी बयानबाजी लगातार बढ़ी है। राजभर अक्सर सपा नेतृत्व पर निशाना साधते रहे हैं, जबकि सपा कार्यकर्ता भी उनके बयानों का विरोध करते रहे हैं। बलिया की घटना को इसी राजनीतिक टकराव की नई कड़ी माना जा रहा है।
बलिया की राजनीति फिर सुर्खियों में
पूर्वांचल की राजनीति में बलिया का विशेष महत्व माना जाता है। यहां राजनीतिक विरोध अक्सर आक्रामक रूप में देखने को मिलता है। राजभर के दौरे से पहले हुआ यह प्रदर्शन आने वाले चुनावी समीकरणों का संकेत भी माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि पूर्वांचल में सुभासपा और सपा के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा आने वाले चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।