कुलगाम के गुडर वन क्षेत्र में 12 घंटे से अधिक चली मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने दो आतंकियों को मार गिराया। इनमें एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है—दरमडोरा शोपियां का रहने वाला आमिर अहमद डार। वह पहलगाम हमले के बाद तैयार की गई 14 स्थानीय आतंकियों की सूची में शामिल था। पुलिस अधिकारी ने पुष्टि की कि आमिर लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा ‘सी कैटेगरी’ का आतंकी था और 30 सितंबर 2023 को आतंकी संगठन में शामिल हुआ था। मारा गया दूसरा आतंकी रहमान भाई पाकिस्तानी नागरिक था, जो लंबे समय से पीर पंजाल क्षेत्र में सक्रिय था।
कैसे हुई मुठभेड़
सुरक्षाबलों को इन दोनों आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली थी। इसके बाद 12 घंटे तक सर्च ऑपरेशन और गोलीबारी जारी रही। रातभर चले इस अभियान में सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने हिस्सा लिया। अंततः दोनों आतंकी मारे गए। अधिकारियों ने बताया कि इससे पहले 2 अगस्त को कुलगाम के अखल वन क्षेत्र में सुरक्षाबलों ने लश्कर के ही आतंकी हारिस नजीर को मार गिराया था, जिसका नाम भी 14 आतंकियों की सूची में था।
14 स्थानीय आतंकियों की सूची — क्या है मामला?
पहलगाम हमले के बाद खुफिया एजेंसियों ने घाटी में सक्रिय 14 स्थानीय आतंकियों की सूची तैयार की थी। इनका संबंध पाकिस्तान समर्थित हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद से था।
अब तक 8 आतंकी मारे जा चुके हैं, जबकि 6 अब भी सक्रिय हैं।
अब सुरक्षाबलों के रडार पर कौन-कौन
सूची में बचे 6 आतंकी :
जुबैर अहमद वानी उर्फ अबू उबैदा (39) : हिजबुल का ए+ कैटेगरी का चीफ ऑपरेशनल कमांडर, 2018 से हमलों में सक्रिय।
आदिल रहमान डेन्टू (21) : 2021 में लश्कर में शामिल, सोपोर जिला कमांडर।
आसिफ अहमद खांडे (24) : जुलाई 2015 में हिजबुल में शामिल, पाकिस्तानी आतंकी नेटवर्क से जुड़ा।
नसीर अहमद वानी (21) : 2019 से लश्कर का सक्रिय सदस्य, शोपियां में सक्रिय।
हारून रशीद गनई (32): अनंतनाग का हिजबुल आतंकी, पीओके यात्रा कर चुका।
जाकिर अहमद गनी (29): लश्कर से जुड़ा, लगातार लक्षित हत्याओं और हमलों में शामिल।
पृष्ठभूमि: घाटी में बदला हुआ माहौल
पिछले दो वर्षों में सुरक्षाबलों ने स्थानीय आतंकियों पर विशेष रणनीति बनाई है। यही वजह है कि 14 में से 8 आतंकी मारे जा चुके हैं। अधिकारियों का मानना है कि घाटी में सक्रिय इन नेटवर्क्स को खत्म करने के लिए ऐसे ऑपरेशन जारी रहेंगे।
सुरक्षा विश्लेषकों के मुताबिक, आमिर अहमद डार जैसे युवा आतंकी स्थानीय भर्ती का चेहरा बनते जा रहे थे। ऐसे ऑपरेशंस से एक ओर आतंकियों की संख्या घट रही है, वहीं स्थानीय युवाओं को चेतावनी भी मिल रही है।
सुरक्षा एजेंसियों की चिंता
हालांकि, एजेंसियों को यह भी चिंता है कि पाकिस्तान से लगातार नए आतंकी घाटी में घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे हैं। रहमान भाई जैसा आतंकी पीर पंजाल में लंबे समय से सक्रिय था। वह स्थानीय नेटवर्क को मजबूत कर रहा था।
स्थानीय लोगों पर असर
मुठभेड़ के दौरान आसपास के इलाकों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं। स्कूल-कॉलेज भी बंद रखे गए। लेकिन आम लोगों को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। पुलिस ने इलाके को सील कर दिया था और ऑपरेशन के दौरान नागरिकों को दूर रखा।
विशेषज्ञों की राय
पूर्व डीजीपी एस.पी. वैद्य के अनुसार, “आतंकी नेटवर्क को खत्म करने की यह रणनीति सफल रही है। स्थानीय आतंकी मारे जाते हैं तो नए भर्ती कम होते हैं। सुरक्षाबलों को उसी दिशा में काम करते रहना चाहिए।”