अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका ईरान को खामेनी के नेतृत्व वाली सरकार से आज़ादी दिलाने में मदद करने के लिए तैयार है। यह बयान तब आया है जब ईरान में राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन जारी हैं और सरकार की सख्त कार्रवाई के कारण देश में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।
ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि ईरान “संभवतः ऐसे स्वतंत्रता की ओर बढ़ रहा है जैसा कभी नहीं देखा गया।” उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका इस दिशा में सहायता के लिए हमेशा तैयार है।
अमेरिका की सैन्य योजना पर चर्चा
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रम्प प्रशासन ने ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई की प्रारंभिक योजना तैयार करना शुरू कर दिया है। न्यूयॉर्क पोस्ट ने वॉल स्ट्रीट जर्नल के हवाले से बताया कि अमेरिकी अधिकारी ट्रम्प की हालिया धमकियों के जवाब में संभावित कदमों पर विचार कर रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एक विकल्प के रूप में ईरानी सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने की एयरस्ट्राइक पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। न तो कोई अमेरिकी सैनिक तैनात किए गए हैं और न ही कोई सैन्य उपकरण भेजा गया है। अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी कहा कि इस तरह की योजना बनाना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और इसका मतलब तुरंत हमला करना नहीं है।
वॉशिंगटन से चेतावनी
ट्रम्प ने ईरान की सरकार को चेतावनी दी है कि वह प्रदर्शनकारियों को मारने की कार्रवाई जारी रखे तो उसका जवाब मिलेगा। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि अगर ईरानी सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाते हैं, तो अमेरिका कड़ी प्रतिक्रिया देगा। यह बयान ईरान में बढ़ते विरोध और अमेरिकी चिंताओं के बीच आया है कि देश में नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।
अमेरिका के पूर्व हमले
यह कोई पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने ईरान पर कार्रवाई की है। जून में अमेरिकी बलों ने कम से कम छह बंकर-बस्टर बम गिराए, जिनमें फोर्डो नाभिकीय संवर्द्धन सुविधा भी शामिल थी। यह साइट लगभग 300 फीट गहरे पहाड़ के नीचे स्थित है।
ये हमले ईरान की इजराइल के खिलाफ नाभिकीय क्षमता इस्तेमाल करने की धमकियों के जवाब में और इजराइल के साथ समन्वित रूप से किए गए। अमेरिका और इजराइल का उद्देश्य था कि ईरान की सैन्य क्षमताओं और संभावित खतरे को कम किया जाए।
खामेनी की प्रतिक्रिया
ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली खामेनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति और अमेरिका की कड़ी आलोचना की। उन्होंने ट्रम्प पर आरोप लगाया कि उनके हाथ ईरानी लोगों के खून से सने हुए हैं। खामेनी ने कहा कि ट्रम्प को पहले अपनी ही देश की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर भी कटाक्ष किया और दावा किया कि उनकी कार्रवाई अमेरिका की पसंद के लिए हो रही है।
ईरान में दमन की बढ़ती कार्रवाई
ईरानी अधिकारी विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए देशभर में दमन की कार्रवाई तेज कर रहे हैं। अब तक कम से कम 65 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जिनमें से 50 प्रदर्शनकारी हैं। सरकार ने चेतावनी दी है कि जो भी लोग प्रदर्शनकारियों की मदद करेंगे, उन्हें “ईश्वर का दुश्मन” माना जाएगा। ईरान में यह आरोप मृत्युदंड तक ले जा सकता है।
विशेषज्ञों और मानवाधिकार संगठनों का अनुमान है कि वास्तविक मृतकों की संख्या इससे कई गुना अधिक हो सकती है और यह 200 से भी ऊपर जा सकती है। यह आंकड़ा सरकार द्वारा दबाए गए विरोध और मीडिया पर नियंत्रण के कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है।
राजनीतिक और वैश्विक प्रभाव
ट्रम्प का बयान और अमेरिकी सैन्य संभावनाओं की चर्चा अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तनाव पैदा कर रही है। अमेरिका की तैयारियों और ईरानी दमन ने क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता है, तो मध्यपूर्व में पहले से जटिल सुरक्षा परिदृश्य और भी गंभीर हो सकता है।
वैश्विक बाजार और तेल की कीमतों पर भी इसका असर पड़ सकता है, क्योंकि ईरान दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शामिल है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर सैन्य कार्रवाई होती है, तो यह क्षेत्रीय संघर्ष को बढ़ा सकती है और शरणार्थी संकट, आर्थिक अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर लंबी अवधि का असर डाल सकती है।
अमेरिकी प्रशासन की स्थिति
अमेरिकी अधिकारियों ने जोर देकर कहा है कि अभी तक कोई हमला तय नहीं हुआ है और सैन्य योजना केवल तैयारी का हिस्सा है। अमेरिका की यह नीति ईरानी नेतृत्व को चेतावनी देने और प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा के लिए दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखी जा रही है।
ईरान में विरोध प्रदर्शन और उसके खिलाफ दमन, अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान और संभावित सैन्य कार्रवाई की खबरें, पूरे विश्व में राजनीतिक और मानवाधिकार संबंधी चिंताओं को बढ़ा रही हैं। ट्रम्प ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका ईरानी जनता की आज़ादी के पक्ष में खड़ा है, जबकि खामेनी ने इसे अमेरिकी हस्तक्षेप करार दिया है।
ईरान में प्रदर्शनकारियों की संख्या और हिंसा बढ़ती जा रही है। भविष्य में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका की चेतावनी, ईरानी सरकार की सख्ती और अंतरराष्ट्रीय दबाव किस तरह से परिस्थितियों को प्रभावित करते हैं।