11वें दिन भी जारी है तबाही
28 फरवरी को जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यह संघर्ष इतने बड़े पैमाने पर फैल जाएगा। आज इस युद्ध का 11वां दिन है और जंग थमने के बजाय और विकराल होती जा रही है। ईरान ने जवाबी हमलों की ऐसी रणनीति अपनाई है जिसने इस युद्ध को पश्चिम एशिया की सीमाओं से भी बाहर धकेल दिया है।
14 देशों में फैली जंग
यह युद्ध अब केवल ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच नहीं रहा। ईरान उन तमाम देशों को निशाना बना रहा है जहाँ अमेरिकी सैन्य अड्डे मौजूद हैं। इस वजह से साइप्रस, लेबनान, इराक, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, सीरिया, कतर और ओमान भी इस युद्ध की चपेट में आ गए हैं। वहीं अमेरिका और इजरायल उन देशों पर हमले कर रहे हैं जहाँ ईरान के सहयोगी संगठन सक्रिय हैं।
पश्चिम एशिया से भी बाहर निकली जंग
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह युद्ध अब पश्चिम एशिया की भौगोलिक सीमाओं को भी तोड़ चुका है। अजरबैजान ने ईरान पर अपने नाकिचिवा इलाके में ड्रोन हमले का आरोप लगाया है जिसमें दो नागरिक घायल हुए हैं। हालाँकि ईरान ने इससे साफ इनकार किया है।इससे भी बड़ी घटना हिंद महासागर में हुई। अमेरिका ने 4 मार्च को एक वीडियो जारी कर बताया कि उसकी एक पनडुब्बी ने श्रीलंका के गॉल शहर के पास हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत देना पर टारपीडो से हमला कर उसे डुबो दिया। सुबह करीब पाँच बजे हुए इस हमले में 80 से अधिक ईरानी नौसैनिकों की मौत हो गई। श्रीलंका ने राहत और बचाव अभियान चलाकर कई नौसैनिकों को बचाया और उनका इलाज श्रीलंका में चल रहा है।
इतना ही नहीं साइप्रस के एक द्वीप पर स्थित ब्रिटेन के एयर बेस को भी ड्रोन से निशाना बनाया गया। अधिकारियों का मानना है कि यह हमला लेबनान में मौजूद हिजबुल्लाह ने किया था।
तेल बाजार में हाहाकार
इस युद्ध का सबसे बड़ा आर्थिक असर तेल के बाजार पर देखा जा रहा है। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुँच गई थीं। हालाँकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की युद्ध जल्द खत्म होने की भविष्यवाणी के बाद इसमें कुछ गिरावट आई लेकिन कीमतें अभी भी पिछले महीने की तुलना में काफी अधिक बनी हुई हैं। गैस की आपूर्ति भी बुरी तरह बाधित हुई है जिसका सीधा असर भारत समेत कई देशों की आम जनता पर पड़ रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यह युद्ध जल्द खत्म होगा लेकिन इस हफ्ते नहीं। इसका सीधा मतलब है कि कम से कम इस सप्ताह तक जंग जारी रहेगी और इस दौरान और तबाही का अंदेशा बना हुआ है। दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि यह वैश्विक संकट कब और कैसे थमेगा।