प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार, 29 जनवरी को नई दिल्ली में आयोजित बीटिंग रिट्रीट समारोह में भाग लिया। इस पारंपरिक सैन्य कार्यक्रम के साथ ही देश के 75वें गणतंत्र दिवस समारोहों का औपचारिक समापन हुआ। विजय चौक पर आयोजित यह समारोह भारतीय सशस्त्र बलों की परंपरा, अनुशासन और सेवा भावना को समर्पित रहा।
हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी बीटिंग रिट्रीट समारोह का आयोजन राजधानी दिल्ली के विजय चौक पर किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रीगण, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और तीनों सेनाओं के शीर्ष अधिकारी उपस्थित रहे।
बीटिंग रिट्रीट समारोह भारतीय गणतंत्र दिवस समारोहों की समापन परंपरा का प्रतीक माना जाता है। यह आयोजन 26 जनवरी को आयोजित गणतंत्र दिवस परेड के तीन दिन बाद होता है और इसके साथ ही औपचारिक कार्यक्रमों का समापन होता है।
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश:
समारोह से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा कि बीटिंग रिट्रीट भारत की स्थायी रक्षा परंपराओं का उत्सव है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समारोह देश की सैन्य विरासत की निरंतरता और मजबूती को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में सशस्त्र बलों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना देश की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा में केंद्रीय भूमिका निभाती हैं। उन्होंने सशस्त्र बलों के अनुशासन और पेशेवर प्रतिबद्धता की भी सराहना की।
अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत श्लोक का उल्लेख किया, जिसमें एकता, साहस और सामूहिक संकल्प पर बल दिया गया है। उन्होंने कहा कि ये मूल्य भारतीय रक्षा सेवाओं की पहचान हैं और संकट के समय देश को मजबूती प्रदान करते हैं।
राष्ट्रपति की उपस्थिति:
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू समारोह की मुख्य अतिथि रहीं। संविधान के अनुसार राष्ट्रपति भारतीय सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर होती हैं। उनकी उपस्थिति में ध्वज अवरोहण की औपचारिक प्रक्रिया पूरी की गई, जो गणतंत्र दिवस समारोहों के औपचारिक समापन का संकेत होती है।
सैन्य परंपरा और आयोजन:
बीटिंग रिट्रीट समारोह की परंपरा कई शताब्दियों पुरानी मानी जाती है। इसका आरंभ सैन्य अभियानों के दौरान दिन के अंत में सैनिकों की वापसी के संकेत के रूप में हुआ था। भारत में यह परंपरा औपचारिक रूप से प्रत्येक वर्ष 29 जनवरी को निभाई जाती है।
समारोह के दौरान भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना के बैंड्स ने संयुक्त रूप से प्रस्तुति दी। देशभक्ति गीतों, पारंपरिक धुनों और सैन्य मार्च की संगठित प्रस्तुति ने कार्यक्रम को विशेष बनाया।
संगीत और अनुशासन का प्रदर्शन:
कार्यक्रम में भारतीय संगीत रचनाओं और सैन्य धुनों का संतुलित संयोजन देखने को मिला। बैंड्स की सटीक तालमेल, अनुशासित संरचनाएं और समन्वय समारोह की विशेष पहचान रही।
ध्वज अवरोहण और सैनिक टुकड़ियों की औपचारिक वापसी के साथ बीटिंग रिट्रीट समारोह संपन्न हुआ। यह प्रक्रिया गणतंत्र दिवस के सभी औपचारिक कार्यक्रमों के पूर्ण होने का संकेत देती है।
सेवा और एकता का संदेश:
बीटिंग रिट्रीट समारोह केवल एक सांस्कृतिक या सैन्य आयोजन नहीं, बल्कि यह सशस्त्र बलों द्वारा निभाए जा रहे सेवा, बलिदान और राष्ट्रीय एकता के मूल्यों को भी रेखांकित करता है। यह आयोजन हर वर्ष नागरिकों को देश की रक्षा में लगे बलों की भूमिका की याद दिलाता है।
इस प्रकार, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की उपस्थिति में आयोजित बीटिंग रिट्रीट समारोह के साथ ही वर्ष 2025 के गणतंत्र दिवस समारोह औपचारिक रूप से संपन्न हुए।