केंद्रीय बजट से पहले देश की आर्थिक स्थिति की समग्र तस्वीर पेश करने वाला आर्थिक सर्वेक्षण आज गुरुवार को संसद के दोनों सदनों में प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्य आर्थिक सलाहकार (Chief Economic Adviser) वी. अनंत नागेश्वरन सुबह लोकसभा और राज्यसभा के पटल पर आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 (इकोनॉमिक सर्वे) रखेंगे। बजट सत्र के दौरान पेश किए जाने वाले इस दस्तावेज़ पर नीति निर्माताओं, अर्थशास्त्रियों, उद्योग जगत और आम जनता की विशेष नजर रहती है, क्योंकि यह आगामी बजट की दिशा और सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं का संकेत देता है।
क्या होता है आर्थिक सर्वेक्षण
आर्थिक सर्वेक्षण केंद्र सरकार का एक आधिकारिक वार्षिक दस्तावेज़ होता है, जिसमें देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति का विश्लेषण किया जाता है। इसमें आर्थिक विकास दर, महंगाई, राजकोषीय घाटा, विदेशी मुद्रा भंडार, निवेश, निर्यात-आयात और रोजगार जैसे प्रमुख आर्थिक संकेतकों की समीक्षा शामिल होती है।
यह सर्वेक्षण न केवल बीते वित्त वर्ष के प्रदर्शन का आकलन करता है, बल्कि मध्यम और दीर्घकालिक आर्थिक संभावनाओं पर भी प्रकाश डालता है।
बजट से पहले क्यों है आर्थिक सर्वे महत्वपूर्ण
आर्थिक सर्वेक्षण को केंद्रीय बजट की रूपरेखा का संकेतक माना जाता है। इसमें दिए गए आकलन और निष्कर्ष आगामी बजट में प्रस्तावित नीतियों और प्राथमिकताओं की झलक देते हैं। यही कारण है कि बजट पेश होने से पहले आर्थिक सर्वे पर व्यापक चर्चा होती है।
आमतौर पर आर्थिक सर्वे बजट से एक दिन पहले पेश किया जाता है, लेकिन इस बार इसे बजट से कुछ दिन पहले संसद में रखा जा रहा है।
बजट सत्र और आगे की प्रक्रिया
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अभिभाषण के साथ बुधवार को संसद के बजट सत्र की शुरुआत हो चुकी है। बजट सत्र दो चरणों में आयोजित किया जाएगा और यह दो अप्रैल तक चलेगा।
बजट सत्र के पहले चरण में आज आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जाएगा, जबकि इसके बाद रविवार, एक फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में केंद्रीय बजट पेश करेंगी।
यह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का लगातार नौवां बजट होगा, जिससे वह एक नया संसदीय रिकॉर्ड स्थापित करेंगी।
कौन तैयार करता है आर्थिक सर्वे
आर्थिक सर्वेक्षण को तैयार करने की जिम्मेदारी वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के अंतर्गत आर्थिक प्रभाग (Economic Division) की होती है। इस प्रक्रिया का नेतृत्व मुख्य आर्थिक सलाहकार करते हैं।
सर्वे में व्यापक डेटा विश्लेषण, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का प्रभाव और घरेलू आर्थिक रुझानों का अध्ययन शामिल होता है। संसद में इसे औपचारिक रूप से मुख्य आर्थिक सलाहकार द्वारा प्रस्तुत किया जाता है।
सरकार की नीतियों का संकेतक
आर्थिक सर्वेक्षण को सरकार की नीतिगत सोच और दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण संदर्भ बिंदु माना जाता है। इसमें सुधारों की दिशा, आर्थिक चुनौतियों और अवसरों की पहचान की जाती है।
साथ ही, यह दस्तावेज़ वित्तीय संकेतकों, मैक्रो-इकोनॉमिक स्थिति और भविष्य की आर्थिक संभावनाओं का संतुलित विश्लेषण प्रस्तुत करता है, जिससे नीति निर्माण और सार्वजनिक बहस को दिशा मिलती है।
कहां मिलेगा आर्थिक सर्वे
संसद में पेश किए जाने के कुछ समय बाद ही आर्थिक सर्वेक्षण को आधिकारिक बजट वेबसाइट Indiabudget.gov.in पर उपलब्ध कराया जाएगा।
जो लोग आर्थिक सर्वे का अध्ययन करना चाहते हैं, वे इसे वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं। यह दस्तावेज़ नीति विशेषज्ञों, छात्रों, शोधकर्ताओं और निवेशकों के लिए एक अहम स्रोत माना जाता है।
बजट से पहले बढ़ी उत्सुकता
आर्थिक सर्वे के पेश होने के साथ ही बजट को लेकर चर्चाएं और तेज हो जाती हैं। इसमें दिए गए आंकड़े और आकलन यह संकेत देते हैं कि सरकार किस क्षेत्र पर अधिक ध्यान दे सकती है और किन आर्थिक चुनौतियों से निपटने की योजना बना रही है।
इसी कारण आर्थिक सर्वे को बजट प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा माना जाता है।