तुर्कमान गेट पर पथराव : दिल्ली की मस्जिद के पास मौजूदगी को लेकर सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी जांच के घेरे में

Vin News Network
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दिल्ली पुलिस ने तुर्कमान गेट पत्थरबाज़ी मामले में सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी को जांच के लिए बुलाने का ऐलान किया

दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हुई पत्थरबाज़ी के मामले में समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी जांच के दायरे में आ गए हैं। दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को बताया कि इस घटना से जुड़े तथ्यों की पड़ताल के लिए सांसद को समन भेजा जाएगा। यह कार्रवाई उस वक्त की गई है, जब पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि नदवी कथित तौर पर कार्रवाई शुरू होने से पहले घटनास्थल के आसपास मौजूद थे।

यह घटना 7 जनवरी की तड़के हुई, जब दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की टीम दिल्ली हाई कोर्ट के आदेशों के तहत तुर्कमान गेट के पास स्थित फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद के आसपास अवैध अतिक्रमण हटाने पहुंची थी। पुलिस के मुताबिक, जैसे ही कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ी, करीब 25 से 30 लोगों की भीड़ ने एमसीडी और पुलिस अधिकारियों पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए। अचानक हुई इस हिंसा के चलते इलाके में तनाव फैल गया और हालात को काबू में लाने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा।

मामले पर जानकारी देते हुए दिल्ली पुलिस के जॉइंट कमिश्नर (सेंट्रल रेंज) मधुर वर्मा ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि सांसद मोहिबुल्लाह नदवी कार्रवाई शुरू होने से पहले वहां मौजूद थे, लेकिन जैसे ही अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई, उससे पहले वे वहां से जा चुके थे। उन्होंने कहा कि इस पहलू की गहन जांच की जा रही है और यदि किसी भी तरह की भूमिका या तथ्य सामने आते हैं, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

मधुर वर्मा ने स्पष्ट किया कि अभी तक यह नहीं कहा जा सकता कि सांसद की मौजूदगी का घटना से सीधा संबंध है या नहीं। पुलिस सभी तथ्यों और साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ केवल ठोस सबूतों के आधार पर ही कदम उठाया जाएगा, चाहे वह आम नागरिक हो या कोई जनप्रतिनिधि।

दिल्ली पुलिस ने इस मामले में तकनीकी साक्ष्यों पर भी तेजी से काम किया है। सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर अब तक 30 लोगों की पहचान की जा चुकी है, जिनका कथित तौर पर पत्थरबाज़ी में हाथ था। पुलिस ने इनमें से पांच आरोपियों काशिफ, मोहम्मद क़ैफ़, मोहम्मद अरीब, अदनान और समीर को गिरफ्तार कर लिया है। अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है और पुलिस का कहना है कि जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पत्थरबाज़ी की यह घटना अचानक भड़की और इसका उद्देश्य सरकारी कार्रवाई को बाधित करना था। एमसीडी की टीम हाई कोर्ट के निर्देशों के तहत अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए मौके पर पहुंची थी और इससे पहले संबंधित पक्षों को कानूनी राहत के लिए पर्याप्त अवसर दिए गए थे। जब अदालत से कोई राहत नहीं मिली, तब यह कार्रवाई शुरू की गई।

इस बीच, राजनीतिक बयानबाज़ी भी सामने आई है। कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया है। उन्होंने कहा कि मस्जिद पूरी तरह सुरक्षित है और कार्रवाई केवल उन ढांचों पर की गई, जिन्हें अदालत ने अवैध माना था। खुर्शीद ने यह भी कहा कि प्रशासन ने तब ही कदम उठाया, जब अदालत से किसी तरह की रोक नहीं मिली।

दिल्ली पुलिस ने भी इस बात पर जोर दिया है कि कार्रवाई के दौरान धार्मिक स्थल को नुकसान पहुंचाने का कोई इरादा या प्रयास नहीं था। अधिकारियों के मुताबिक, अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह से कानून के दायरे में की जा रही थी और हिंसा भड़काने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी तरह की दोबारा हिंसा को रोका जा सके। पुलिस स्थानीय लोगों से शांति बनाए रखने की अपील कर रही है और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर भी नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के साथ सख्ती से निपटा जाएगा।

सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी को समन भेजे जाने की तैयारी को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, पुलिस ने साफ किया है कि यह कदम जांच प्रक्रिया का हिस्सा है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की जांच की जाएगी। सांसद की मौजूदगी, उनकी गतिविधियां और घटना के समय की परिस्थितियां इन सभी बिंदुओं को जांच में शामिल किया जा रहा है।

तुर्कमान गेट की यह घटना एक बार फिर राजधानी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाइयों के दौरान उत्पन्न होने वाले तनाव और हिंसा की ओर इशारा करती है। पुलिस और प्रशासन का कहना है कि अदालत के आदेशों का पालन करना उनकी जिम्मेदारी है, जबकि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। आने वाले दिनों में जांच आगे बढ़ने के साथ यह साफ हो सकेगा कि इस मामले में किन-किन लोगों की भूमिका रही और किस पर क्या कार्रवाई होती है।

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