विन न्यूज़ नेटवर्क। बिहार की राजधानी पटना से हैरान करने वाली घटना सामने आई है। पिपरा थाना क्षेत्र के बेहरावां चकिया मुसहरी टोला में पुलिस की छापेमारी के दौरान भगदड़ मच गई। ग्रामीणों का आरोप है कि कार्रवाई से डरकर करीब 50 से 60 लोगों ने जान बचाने के लिए पुनपुन नदी में छलांग लगा दी।
इस दौरान दो लोगों की डूबने से मौत हो गई। वहीं, ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने का दावा किया है। पुलिस ने पूरे मामले की जांच की बात कही है।
कई थानों की पुलिस ने की छापेमारी
जानकारी के मुताबिक, बेहरावां चकिया मुसहरी टोला में कई थानों की पुलिस की संयुक्त टीम ने छापेमारी की। बताया जा रहा है कि कार्रवाई में करीब 80 पुलिसकर्मी शामिल थे। पुलिस के मुताबिक, इलाके में पहले पुलिस टीम पर हमले की घटना सामने आई थी, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने करीब 1000 लीटर देसी शराब बरामद कर नष्ट करने की कार्रवाई की। इसके अलावा एक देशी पिस्टल और तीन जिंदा कारतूस बरामद किए जाने की बात पुलिस ने कही है। कार्रवाई के दौरान कई लोगों को हिरासत में लिया गया और अब तक 43 गिरफ्तारियों की जानकारी सामने आई है।
पुलिस कार्रवाई के दौरान मची भगदड़
ग्रामीणों का आरोप है कि बड़ी संख्या में पुलिस बल अचानक गांव में पहुंचा, जिसके बाद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों के मुताबिक, कई महिला, पुरुष और बच्चे डरकर नदी की तरफ भागे और अपनी जान बचाने के लिए पानी में कूद गए।
स्थानीय लोगों का दावा है कि नदी में कूदने वालों की संख्या 50 से 60 के आसपास थी। कुछ ग्रामीणों ने पुलिस पर नदी की ओर ईंट-पत्थर चलाने का भी आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दो लोगों की डूबने से मौत
घटना के बाद नदी में तलाशी अभियान चलाया गया। इस दौरान दो लोगों के शव बरामद किए गए। मृतकों की पहचान 25 वर्षीय आकाश कुमार और 60 वर्षीय रामू मांझी के रूप में हुई है।
आकाश कुमार ढीबरा हसनपुर के रहने वाले थे और बेहरावां चकिया में अपने मामा के ससुराल में रहते थे। वहीं, रामू मांझी स्थानीय निवासी बताए जा रहे हैं।
ग्रामीणों ने किया सड़क जाम
दो लोगों की मौत के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों ने बिहटा-सरमेरा मुख्य मार्ग को करीब 10 घंटे तक जाम रखा और पुलिस कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन किया।
स्थानीय लोगों ने दावा किया कि बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं। हालांकि, लापता लोगों की संख्या को लेकर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि करीब 40-45 लोग हिरासत में हैं।
ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
स्थानीय ग्रामीणों ने पुलिस पर कार्रवाई के दौरान डराने-धमकाने और घरों में जबरन हथियार रखने के आरोप लगाए हैं। कुछ लोगों का कहना है कि उनके घरों से हथियार बरामद होने की बात पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज की गई, जबकि उनके मुताबिक ऐसा कुछ नहीं हुआ।
ग्रामीणों ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
एसडीपीओ बोले- जांच के बाद होगी कार्रवाई
अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी राघव दयाल ने कहा कि पुलिस एक मामले को लेकर छापेमारी करने गई थी। उनके मुताबिक, पुलिस टीम पर पहले हमला किए जाने की घटना सामने आई थी और उसी के संबंध में कार्रवाई की गई।
एसडीपीओ ने कहा कि छापेमारी के दौरान कुछ लोग इधर-उधर भागने लगे। पूरे मामले की जांच की जा रही है और जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पूर्व विधायक ने भी उठाए सवाल
घटना की जानकारी मिलने के बाद पूर्व विधायक गोपाल रविदास भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। उनका कहना है कि पुलिस की कार्रवाई के डर से कई लोग नदी में कूदे और इसी दौरान दो लोगों की मौत हुई।
फिलहाल प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि छापेमारी के दौरान वास्तव में क्या हुआ और नदी में कूदने की घटना किन परिस्थितियों में हुई।