अहमदाबाद में हुए एअर इंडिया विमान हादसे की जांच अब अपने अंतिम चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। अमेरिकी इंजन निर्माता कंपनी GE एयरोस्पेस ने हादसे से जुड़ी अपनी तकनीकी इंजन एनालिसिस रिपोर्ट का बड़ा हिस्सा एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) को सौंप दिया है। माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट के मिलने के बाद जांच एजेंसी के लिए अंतिम रिपोर्ट तैयार करने का रास्ता काफी हद तक साफ हो गया है।
यह हादसा 12 जून 2025 को हुआ था, जब अहमदाबाद से लंदन गैटविक जा रही एअर इंडिया की बोइंग 787 ड्रीमलाइनर फ्लाइट टेकऑफ के कुछ ही सेकंड बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। विमान बीजे मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल परिसर पर जा गिरा था। इस भीषण हादसे में विमान में सवार 242 लोगों में से केवल एक यात्री जीवित बचा, जबकि जमीन पर मौजूद लोगों समेत कुल 260 लोगों की मौत हो गई थी।
सूत्रों के अनुसार, GE एयरोस्पेस द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट में इंजन से जुड़ा तकनीकी विश्लेषण शामिल है। चूंकि विमान में कंपनी के GEnx-1B70 इंजन लगे थे, इसलिए जांच में इस रिपोर्ट को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि कंपनी ने अभी तक सार्वजनिक रूप से यह नहीं बताया है कि रिपोर्ट में इंजन को लेकर क्या निष्कर्ष सामने आए हैं।
AAIB ने हादसे की पहली बरसी पर जारी अपने अंतरिम बयान में कहा था कि विमान के फ्लाइट रिकॉर्डर, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर, इंजन के पुर्जों और मेंटेनेंस रिकॉर्ड की विस्तृत जांच की गई है। एजेंसी के अनुसार अंतिम रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय मानकों और विशेषज्ञों की समीक्षा के बाद ही जारी की जाएगी।
जुलाई 2025 में जारी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि टेकऑफ के तुरंत बाद दोनों फ्यूल कंट्रोल स्विच रन से कटऑफ मोड में चले गए थे, जिससे दोनों इंजन बंद हो गए। कॉकपिट रिकॉर्डिंग में इस घटना को लेकर दोनों पायलटों के बीच बातचीत भी दर्ज हुई थी, जिसने कई नए सवाल खड़े कर दिए थे। हालांकि रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि स्विच किसने बदले और किन परिस्थितियों में ऐसा हुआ।
प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद पायलट संगठनों ने भी कई सवाल उठाए थे। फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स और इंडियन कमर्शियल पायलट्स एसोसिएशन ने पायलटों की भूमिका को लेकर जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने का विरोध किया था और अतिरिक्त तकनीकी डेटा सार्वजनिक करने की मांग की थी।
इस मामले पर सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक विमानन उद्योग की भी नजर बनी हुई है। यदि अंतिम रिपोर्ट में किसी तकनीकी खामी की पुष्टि होती है, तो इसका असर बोइंग 787 विमानों, इंजन निर्माताओं और विमानन क्षेत्र से जुड़ी बीमा कंपनियों पर भी पड़ सकता है। साथ ही दुनिया भर के एविएशन रेगुलेटर भविष्य में नए सुरक्षा निर्देश जारी कर सकते हैं।
फिलहाल 260 मृतकों के परिवार अंतिम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। उनके लिए यह सिर्फ एक जांच नहीं, बल्कि अपने प्रियजनों की मौत के पीछे की असली वजह जानने की उम्मीद है। अब सभी की निगाहें AAIB की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस हादसे से जुड़े सबसे बड़े सवालों का जवाब दे सकती है।