साध्वी प्रज्ञा ठाकुर की तबीयत बिगड़ी, मुंबई के निजी अस्पताल में भर्ती

कोर्ट से राहत के बाद साध्वी की हालत गंभीर, अस्पताल में भर्ती

Vin News Network
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मालेगांव केस से राहत, लेकिन सेहत बनी चिंता – अस्पताल में भर्ती साध्वी प्रज्ञा
Highlights
  • मालेगांव ब्लास्ट केस से 31 जुलाई को कोर्ट से बरी हुईं साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर
  • 1 अगस्त की सुबह तबीयत बिगड़ने पर मुंबई के निजी अस्पताल में भर्ती
  • वर्षों से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहीं हैं पूर्व सांसद

मुंबई। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की पूर्व सांसद और मालेगांव ब्लास्ट केस की एक चर्चित आरोपी रहीं साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की तबीयत 1 अगस्त, शुक्रवार की सुबह अचानक बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें फौरन मुंबई के एक निजी मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह खबर उस वक्त आई जब एक दिन पहले ही (31 जुलाई) उन्हें मालेगांव विस्फोट मामले में विशेष एनआईए अदालत से बरी किया गया था। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं पाए गए।

क्या हुआ साध्वी प्रज्ञा को?
अस्पताल से जुड़े सूत्रों ने बताया कि साध्वी प्रज्ञा को सांस लेने में तकलीफ, ब्लड प्रेशर और तेज़ सिरदर्द की शिकायत थी। प्राथमिक जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें निगरानी में रखा है। अस्पताल प्रशासन ने उनकी स्थिति को “स्थिर लेकिन नाजुक” बताया है।

बीजेपी नेताओं और उनके शुभचिंतकों का कहना है कि कोर्ट की लंबी प्रक्रिया, मानसिक दबाव और पुराने शारीरिक रोगों की वजह से उनकी तबीयत बार-बार बिगड़ती रही है।

स्वास्थ्य समस्याएं पहले से भी थीं
साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर पिछले कई वर्षों से स्पाइनल इंफेक्शन, हाई ब्लड प्रेशर और अस्थमा जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रही हैं। साल 2024 में उन्होंने 6 नवंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक फोटो शेयर की थी जिसमें वह अस्पताल के बेड पर दिखाई दे रही थीं। उस तस्वीर के साथ उन्होंने लिखा था: “अगर जिंदा रही, तो कोर्ट जरूर जाऊंगी। मेरा शरीर अब मुझे छोड़ रहा है, लेकिन मेरी आत्मा सच्चाई के लिए लड़ती रहेगी।”

टॉर्चर के आरोप और अदालत की कार्यवाही
साध्वी प्रज्ञा लंबे समय से दावा करती रही हैं कि महाराष्ट्र एटीएस (ATS) ने उन्हें मालेगांव ब्लास्ट की जांच के दौरान शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया था। उन्होंने कहा था कि जांच के नाम पर उन्हें बुरी तरह पीटा गया, अपमानित किया गया और कई दिनों तक नींद नहीं दी गई। हालांकि, कोर्ट में इस बात के कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिले, लेकिन उनके वकीलों ने इसे अदालत के समक्ष गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन बताया।

31 जुलाई को मिली राहत
31 जुलाई 2025 को एनआईए कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा को मालेगांव विस्फोट मामले से बरी कर दिया, यह कहते हुए कि उनके खिलाफ पेश किए गए सबूत ‘अपर्याप्त और संदिग्ध’ हैं। साध्वी प्रज्ञा के समर्थकों ने इस फैसले को “सच्चाई की जीत” बताया, वहीं कुछ सामाजिक संगठनों ने इस पर सवाल भी उठाए।

राजनीतिक सफर और विचारधारा
साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को 2019 में बीजेपी ने भोपाल से लोकसभा चुनाव में टिकट दिया था, जहां उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह को हराया था। उनके चुनावी प्रचार के दौरान भी उनके बयानों को लेकर कई बार विवाद हुआ।

उनकी पहचान एक प्रखर हिंदू राष्ट्रवादी नेता के रूप में रही है। वे अक्सर भगवा विचारधारा के समर्थन और धर्म आधारित राजनीतिक बयानों के लिए सुर्खियों में रहती हैं।

भविष्य पर सवाल
उनकी बिगड़ी तबीयत ने एक बार फिर उनके राजनीतिक भविष्य और स्वास्थ्य संबंधी चिंता को चर्चा में ला दिया है। सूत्रों के मुताबिक, वे अब पूरी तरह राजनीति से दूर रहकर आध्यात्मिक जीवन को प्राथमिकता देना चाहती हैं, हालांकि इस पर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

बीजेपी की ओर से भी फिलहाल उनकी सेहत को लेकर कोई औपचारिक प्रेस रिलीज नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक पार्टी अध्यक्ष और कई वरिष्ठ नेताओं ने अस्पताल प्रबंधन से बात की है और उनका हालचाल जाना है।

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