विन न्यूज नेटवर्क। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध का असर अब भारत के एक परिवार पर भी गहरा पड़ा है। उत्तर प्रदेश के कानपुर निवासी और मर्चेंट नेवी के चीफ ऑफिसर सागर गुप्ता की कथित तौर पर ड्रोन हमले में मौत हो गई। घटना के कई दिन गुजर जाने के बावजूद परिवार को अब तक किसी सरकारी विभाग या शिपिंग कंपनी की ओर से आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। इससे परिजनों की चिंता और बढ़ गई है। परिवार ने केंद्र सरकार, विदेश मंत्रालय और संबंधित शिपिंग कंपनी से अपील की है कि सागर का पार्थिव शरीर जल्द से जल्द भारत लाया जाए, ताकि उनका अंतिम संस्कार किया जा सके।
रूस की ओर जा रहे जहाज पर हुआ हमला
मिली जानकारी के अनुसार, कानपुर के रहने वाले 30 वर्षीय सागर गुप्ता ‘एवन नेविगेटर’ कंपनी के माध्यम से मर्चेंट नेवी में चीफ ऑफिसर के पद पर कार्यरत थे। बताया जा रहा है कि 18 जुलाई को उनका जहाज रूस की ओर जा रहा था। इसी दौरान जहाज पर ड्रोन से हमला हुआ।
बताया गया कि हमले के समय सागर जहाज के डेक पर मौजूद थे। इसी दौरान वह हमले की चपेट में आ गए और उनकी मौत हो गई। हालांकि घटना को लेकर अब तक भारतीय अधिकारियों या संबंधित कंपनी की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
परिजनों को तीन दिन बाद मिली घटना की जानकारी
सागर गुप्ता के परिवार का कहना है कि उन्हें इस घटना की जानकारी 21 जुलाई को मिली। इसके बाद से वे लगातार शिपिंग कंपनी और संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें कोई लिखित सूचना या आधिकारिक पुष्टि नहीं दी गई है।
परिवार का कहना है कि लगातार इंतजार और अनिश्चितता ने उनकी परेशानी को और बढ़ा दिया है। उन्हें अभी तक यह भी स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया कि पार्थिव शरीर कब और कैसे भारत लाया जाएगा।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
सागर गुप्ता अपने पीछे एक छोटे से परिवार को छोड़ गए हैं। परिवार में उनकी मां रमा गुप्ता, पत्नी शालू गुप्ता, पांच वर्षीय बेटी गौरी और सात महीने का बेटा कृष्ण हैं। सागर के पिता रूप नारायण गुप्ता का पहले ही निधन हो चुका है।
अब परिवार की जिम्मेदारी पूरी तरह उनके पीछे छूटे परिजनों पर आ गई है। सागर के बड़े भाई मनीष गुप्ता और उनकी चारों बहनें लगातार सरकार से मदद की गुहार लगा रही हैं। उनका कहना है कि परिवार सिर्फ अपने बेटे का अंतिम दर्शन करना चाहता है।
सरकार और कंपनी से हस्तक्षेप की मांग
परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद न तो शिपिंग कंपनी की ओर से उन्हें स्पष्ट जानकारी दी गई और न ही किसी सरकारी एजेंसी ने उनसे औपचारिक संपर्क किया। उनका कहना है कि इस कठिन समय में उन्हें हर स्तर पर सहयोग की जरूरत है।
परिवार ने केंद्र सरकार, विदेश मंत्रालय और उत्तर प्रदेश सरकार से अपील की है कि मामले में तत्काल हस्तक्षेप किया जाए और सागर गुप्ता के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत लाने की व्यवस्था की जाए।
युद्ध का असर आम नागरिकों तक
रूस-यूक्रेन युद्ध ने पिछले कई वर्षों में हजारों लोगों की जान ली है और इसका असर केवल युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर काम करने वाले मर्चेंट नेवी के अधिकारी और कर्मचारी भी कई बार जोखिम भरी परिस्थितियों का सामना करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध प्रभावित क्षेत्रों के पास समुद्री मार्गों पर चलने वाले जहाजों को सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे हालात में वहां काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है।
परिवार को अंतिम विदाई का इंतजार
सागर गुप्ता के घर में इस समय मातम पसरा हुआ है। पत्नी, मां और छोटे बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार का कहना है कि उन्हें किसी तरह की आर्थिक सहायता से पहले अपने बेटे का पार्थिव शरीर चाहिए, ताकि पूरे सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार किया जा सके।
अब सभी की निगाहें सरकार और संबंधित एजेंसियों पर टिकी हैं कि वे कितनी जल्द आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर सागर गुप्ता के पार्थिव शरीर को भारत लाने की व्यवस्था करते हैं। साथ ही, परिवार को उम्मीद है कि उन्हें जल्द आधिकारिक जानकारी और आवश्यक सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी।