अफ़ग़ानिस्तान से उपजी भ्रामक ख़बरों ने पाकिस्तान की सियासत और जनमानस में भारी हलचल पैदा कर दी थी। सोशल मीडिया पर यह दावा फैलाया जा रहा था कि पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (PTI) के प्रमुख इमरान खान की जेल में मृत्यु हो चुकी है। इन अपुष्ट अफ़वाहों ने न सिर्फ़ उनके समर्थकों को बेचैन कर दिया, बल्कि उनके परिवार में भी गहरी चिंता और भय का माहौल पैदा कर दिया। लगभग तीन सप्ताह तक खान की सेहत या उनकी मौजूदगी का कोई आधिकारिक सबूत नहीं मिलने से स्थिति और तनावपूर्ण हो गई थी।
लेकिन अनेक दिनों की आशंका और असमंजस के बाद मंगलवार को आखिरकार पुष्टि हो गई कि इमरान खान सकुशल हैं और अडियाला जेल में कैद हैं। इस आश्वासन के पीछे उनकी बहन डॉ. उज़्मा खान को मिला वह दुर्लभ अवसर था, जब उन्हें जेल के भीतर जाकर अपने भाई से मुलाक़ात करने की अनुमति मिली। परिवार और पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह मुलाक़ात मात्र बीस मिनट की थी, लेकिन उसने उन सभी अफ़वाहों को पूरी तरह शांत कर दिया, जो पिछले कई दिनों से उभर रही थीं।
परिवार की बेचैनी और “प्रूफ़ ऑफ़ लाइफ़” की मांग
इमरान खान के दोनों पुत्रों कासिम खान और सुलेमान खान ने पिछले हफ्तों में खुलकर आरोप लगाया था कि पाकिस्तान की जेल प्रशासन उनकी वास्तविक स्थिति छिपा रहा है। उनका कहना था कि लगभग 20 दिनों से न तो उन्हें कोई कॉल मिली, न ही किसी विश्वसनीय स्रोत से पता चला कि उनके पिता सुरक्षित हैं। इस कारण उन्होंने यह तक कह दिया कि ऐसा लगता है कि “अधिकारियों के पास बताने के लिए कुछ बेहद गंभीर या अपरिवर्तनीय स्थिति है।”
इसी पृष्ठभूमि में खान परिवार ने अडियाला जेल के बाहर प्रदर्शन भी किया और सरकार व जेल प्रशासन पर दबाव बढ़ाया कि उन्हें तुरंत ‘सबूत-ए-ज़िंदगी’ (proof of life) दिया जाए। प्रदर्शन के बाद ही डॉ. उज़्मा खान को मुलाक़ात की अनुमति दी गई। मुलाक़ात के बाद उन्होंने मीडिया को बताया कि इमरान खान मानसिक रूप से मज़बूत हैं, हालांकि जेल की कठोर परिस्थितियों के कारण शारीरिक रूप से कुछ कमज़ोरी ज़रूर महसूस की जा रही है। उन्होंने कहा कि परिवार का संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक उन्हें अपने भाई की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती और नियमित रूप से संपर्क की सुविधा नहीं मिल जाती।
अगस्त 2023 से कैद, 14 साल की सज़ा
इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं। पाकिस्तान की एक अदालत ने उन्हें कथित भ्रष्टाचार और तोशाखाना मामले में 14 साल कैद की सज़ा सुनाई है। PTI का दावा है कि यह सब राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है और पूर्व प्रधानमंत्री को चुनावी राजनीति से दूर रखने की कोशिशें हैं। पार्टी नेतृत्व और समर्थकों का आरोप है कि खान के खिलाफ़ चलाए जा रहे मामलों में कानूनी पारदर्शिता और निष्पक्षता का अभाव है। जेल में उनकी सुरक्षा, सेहत और कानूनी अधिकारों को लेकर पहले भी कई बार चिंताएँ सामने आती रही हैं। पार्टी यह दावा करती रही है कि इमरान खान को अकेलेपन में रखा जा रहा है और उनके साथ मिलने-जुलने की स्वतंत्रता सीमित कर दी गई है।
अफ़ग़ानिस्तान से फैली अफ़वाहें कैसे बनी संकट की वजह?
अफ़ग़ान सोशल मीडिया नेटवर्क्स और कुछ गैर-आधिकारिक स्रोतों से यह झूठी ख़बर फैली कि इमरान खान अब इस दुनिया में नहीं रहे। पाकिस्तान में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं ने बिना पुष्टि किए इन संदेशों को साझा करना शुरू कर दिया, जिसके चलते देखते ही देखते स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। कई घंटों तक सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर ‘इमरान खान डेथ’ जैसे हैशटैग ट्रेंड करते रहे, जिससे परिवार और समर्थकों की मानसिक स्थिति और भी विचलित हो गई।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब पाकिस्तान के आधिकारिक संस्थानों की ओर से तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। यह चुप्पी खान के परिवार के संदेह को बढ़ाती रही, और इसी वजह से उन्होंने मुलाक़ात की अनुमति के लिए जोरदार प्रयास शुरू किए।
राजनीतिक तापमान और बढ़ा
इमरान खान पाकिस्तान की राजनीति में एक अत्यंत प्रभावशाली व्यक्तित्व हैं। उनकी गिरफ्तारी और जेल में मौजूदगी शुरू से ही राजनीतिक बहस का केंद्रीय विषय रही है। मौजूदा सरकार और PTI के बीच टकराव किसी से छिपा नहीं है, और खान से जुड़ी हर ख़बर आम जनता तथा राजनीतिक हलकों में व्यापक प्रतिक्रिया उत्पन्न करती है।
इस बीच, झूठी सूचना पर आधारित हालिया विवाद ने देश में राजनीतिक अस्थिरता की भावना को और गहरा कर दिया। PTI ने इसे सरकार की “अक्षम और असंवेदनशील” नीतियों का परिणाम बताया है, जबकि सरकार ने इसे विपक्ष का “अनावश्यक राजनीतिक हंगामा” कहा है।
परिवार और समर्थक आगे की लड़ाई के लिए तैयार
इमरान खान के परिवार ने स्पष्ट कर दिया है कि वे पारदर्शिता के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। उनका कहना है कि नियमित मुलाक़ातें, स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी और कानूनी अधिकार में ये सब किसी भी कैदी का मूल अधिकार है, और इमरान खान भी इससे अलग नहीं। देशभर में भी PTI समर्थक घटनाक्रम को लेकर काफ़ी सतर्क हैं और आगे किसी भी नई चर्चा या विवाद पर नज़र बनाए हुए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा पाकिस्तान की राजनीति में और तेज़ी से उभर सकता है।