अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर और तेज हो गया है, जिससे वैश्विक व्यापार और तेल बाजार पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। अमेरिका ने साफ चेतावनी दी है कि जो शिपिंग कंपनियां इस अहम समुद्री मार्ग से सुरक्षित गुजरने के लिए ईरान को भुगतान करेंगी, उन पर सख्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। अमेरिकी ट्रेजरी के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) ने कहा है कि अमेरिकी नागरिकों और कंपनियों के लिए ईरानी सरकारी संस्थाओं को किसी भी रूप में भुगतान करना प्रतिबंधित है, और ऐसा करने पर गैर-अमेरिकी कंपनियां भी प्रतिबंधों के जोखिम में आ सकती हैं।
इस चेतावनी से समुद्री और शिपिंग सेक्टर में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि ईरानी बंदरगाहों से जुड़े जहाजों और कंपनियों पर पहले से ही कई तरह के प्रतिबंध लागू हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के हालिया प्रस्ताव पर असंतोष जताया है, जिससे दोनों देशों के बीच जारी गतिरोध के खत्म होने की संभावना कम नजर आ रही है। अमेरिका का रुख साफ है कि जब तक ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने वाला समझौता नहीं होता, तब तक दबाव बनाए रखा जाएगा, जबकि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह शांतिपूर्ण बताता रहा है।
हालांकि 8 अप्रैल को सीजफायर के बाद दोनों देशों के बीच सीधी सैन्य टकराव में कमी आई है, लेकिन कई अहम मुद्दों पर मतभेद अब भी कायम हैं। इनमें ईरान का परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण प्रमुख हैं। युद्ध के बाद ईरान ने इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही सीमित कर दी है, वहीं अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों के आसपास अपनी नौसैनिक मौजूदगी बढ़ा दी है।
इस बीच, ईरान की ओर से यह दावा भी किया गया है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलना शुरू कर दिया है, जिसकी पहली आय केंद्रीय बैंक में जमा की गई है। OFAC के अनुसार, यह भुगतान नकद, डिजिटल एसेट्स, अनौपचारिक सौदों या अन्य माध्यमों से किया जा सकता है, जिसमें चैरिटी या दूतावासों के जरिए किए गए भुगतान भी शामिल हो सकते हैं।
पहले भी ईरान संकेत दे चुका है कि इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने की अनुमति केवल मित्र देशों को दी जाएगी और अन्य जहाजों पर टोल लगाया जा सकता है। चूंकि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से तेल, खाद्य पदार्थ, दवाइयां और तकनीकी सामान का बड़ा हिस्सा गुजरता है, ऐसे में यहां बढ़ता तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है।