ज्ञानेश कुमार ने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हुए मतदान को आज़ाद भारत के इतिहास में सबसे अधिक बताया है। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों में इस बार रिकॉर्ड स्तर पर मतदाताओं ने भागीदारी की और लोकतंत्र को मजबूत किया। आंकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु में लगभग 84% से अधिक और पश्चिम बंगाल के पहले चरण में 91% से ज्यादा मतदान दर्ज किया गया, जो अब तक का सबसे ऊंचा प्रतिशत है। खास बात यह रही कि दोनों राज्यों में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से अधिक रही, जो लोकतांत्रिक जागरूकता का सकारात्मक संकेत है।
मनोज कुमार अग्रवाल ने भी जानकारी दी कि पश्चिम बंगाल में पहले चरण के तहत 152 सीटों और करीब 45 हजार मतदान केंद्रों पर वोटिंग शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई। मतदान के बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को सील कर सुरक्षित स्ट्रॉन्ग रूम में भेजा जा रहा है। उन्होंने बताया कि लोगों ने बिना किसी डर के मतदान किया और चुनाव आयोग की व्यवस्थाओं से संतुष्टि जताई।
जिलावार आंकड़ों में दक्षिण दिनाजपुर, कूचबिहार, बीरभूम और जलपाईगुड़ी जैसे जिलों में 93 से 94 प्रतिशत तक मतदान दर्ज किया गया, जबकि अन्य जिलों में भी मतदान प्रतिशत 89 से 92 के बीच रहा। दार्जिलिंग और कलिम्पोंग जैसे इलाकों में अपेक्षाकृत कम, लेकिन फिर भी मजबूत मतदान देखने को मिला। इस चरण में कुल 1,478 उम्मीदवारों, जिनमें 167 महिलाएं शामिल हैं, के भाग्य का फैसला मतपेटियों में बंद हो गया है। भीषण गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में मतदाता सुबह से ही कतारों में खड़े नजर आए, हालांकि कुछ स्थानों पर छिटपुट हिंसा की घटनाएं भी सामने आईं, जिससे चुनावी माहौल में हल्का तनाव बना रहा।