चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने मेघालय सरकार की ओर से दायर याचिका पर नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई तय की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चूंकि सोनम पहले ही जेल से रिहा हो चुकी हैं और जमानत की शर्तों का पालन कर रही हैं, इसलिए इस चरण पर उन्हें दोबारा जेल भेजना उचित नहीं माना जा सकता।
हनीमून ट्रिप के दौरान हुई थी राजा रघुवंशी की हत्या
मामले के अनुसार इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की शादी 11 मई 2025 को सोनम रघुवंशी से हुई थी। शादी के बाद दोनों हनीमून मनाने के लिए मेघालय गए थे। चेरापूंजी घूमने के दौरान राजा अचानक लापता हो गए। कुछ समय बाद उनका शव एक गहरी खाई से बरामद हुआ। पुलिस जांच में हत्या की साजिश का खुलासा हुआ, जिसके बाद सोनम रघुवंशी, उसके कथित प्रेमी राज कुशवाहा और अन्य सहयोगियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया। जून 2025 में सोनम को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया था।
गिरफ्तारी में पुलिस की लापरवाही बनी जमानत की वजह
सोनम को जमानत मिलने की सबसे बड़ी वजह पुलिस की जांच और गिरफ्तारी प्रक्रिया में हुई गंभीर लापरवाही रही। गिरफ्तारी मेमो और केस डायरी में हत्या से संबंधित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 की जगह गलती से धारा 403 दर्ज कर दी गई, जबकि बीएनएस में ऐसी कोई धारा मौजूद ही नहीं है। इतना ही नहीं, पुलिस रिकॉर्ड में सोनम को गलती से ‘सेना का भगोड़ा’ तक लिख दिया गया। अदालत ने इसे आरोपी के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन माना।
हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा था जमानत का आदेश
निचली अदालत ने 28 अप्रैल 2026 को सोनम को सशर्त जमानत दे दी थी। अदालत ने कहा था कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को सही कानूनी जानकारी नहीं देना संविधान के अनुच्छेद 22(1) का उल्लंघन है। इसके खिलाफ मेघालय सरकार ने हाई कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन 29 जून 2026 को हाई कोर्ट ने भी राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी और जमानत का आदेश बरकरार रखा।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की पीठ ने प्रारंभिक तौर पर कहा कि गिरफ्तारी मेमो में गलत धारा लिखना अपने आप में जमानत का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता। हालांकि, जब अदालत को बताया गया कि सोनम पहले ही रिहा हो चुकी हैं और शिलांग में जमानत की शर्तों का पालन कर रही हैं, तब कोर्ट ने फिलहाल उनकी जमानत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
मेघालय सरकार ने रखा अपना पक्ष
मेघालय सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में दलील दी कि यह एक बेहद गंभीर और जघन्य अपराध है। उन्होंने कहा कि सोनम ने कथित तौर पर अपने पति को हनीमून के बहाने मेघालय ले जाकर साथियों के साथ मिलकर उसकी हत्या कर दी और शव को गहरी खाई में फेंक दिया। घटना के बाद वह फरार हो गई थीं और बाद में उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार की गईं। सरकार ने अदालत से जमानत रद्द करने की मांग की।
पुणे हत्याकांड का भी दिया गया हवाला
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने अदालत के सामने पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में अदालतों को सख्त रुख अपनाने की आवश्यकता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस उदाहरण पर कोई टिप्पणी नहीं की और केवल मौजूदा मामले की कानूनी स्थिति पर ही विचार किया।
94 गवाहों में अब तक केवल 4 की गवाही
सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी कहा कि जमानत रद्द करने के मुद्दे पर अंतिम फैसला सुनवाई के दौरान ट्रायल की प्रगति को देखते हुए लिया जाएगा। कोर्ट ने मुकदमे की धीमी रफ्तार पर चिंता जताते हुए कहा कि मामले में कुल 94 गवाह हैं, लेकिन अब तक केवल चार गवाहों की ही गवाही पूरी हो सकी है। अब इस बहुचर्चित मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी।