कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संसद परिसर में पुतिन की भारत यात्रा को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार विपक्षी नेताओं को विदेशी गणमान्य व्यक्तियों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों से मिलने से रोक रही है। राहुल गांधी ने इस कदम को लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया और कहा कि यह केवल राजनीतिक नियंत्रण और असुरक्षा की भावना को दर्शाता है।
राहुल गांधी ने मीडिया से बातचीत में कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्रालय अब यह दावा कर रहे हैं कि सुरक्षा कारणों से विपक्ष को विदेशियों से मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही। यह बहाना मात्र है। लोकतंत्र में विपक्ष को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवाद का समान अधिकार होना चाहिए।” उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की वैश्विक छवि तभी मजबूत रहेगी जब सभी राजनीतिक दल स्वतंत्र रूप से अपने कर्तव्यों का पालन कर सकें।
इस मसले पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने व्यंग्यपूर्ण अंदाज में कहा, “इस समय क्या होने वाला है, भगवान ही जानते हैं।” उनका इशारा सरकार की नीति और विपक्ष के लिए बनाई गई बाधाओं की ओर था। उन्होंने संकेत दिया कि मौजूदा स्थिति लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और पारंपरिक राजनीतिक व्यवहार के अनुरूप नहीं है।
विश्लेषकों का कहना है कि राहुल और प्रियंका गांधी की टिप्पणियाँ केवल राजनीतिक बयान नहीं हैं, बल्कि यह संकेत हैं कि विपक्ष की आवाज़ को कम करने और विदेश नीति पर नियंत्रण रखने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। विपक्ष का आरोप है कि इस तरह के कदम भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय छवि पर सवाल उठाते हैं।
कांग्रेस नेताओं के अनुसार लोकतंत्र में सभी दलों को स्वतंत्र रूप से अंतरराष्ट्रीय संपर्क बनाने का अधिकार होना चाहिए। राहुल गांधी ने कहा कि जब सरकार यह तय करती है कि किस विपक्षी नेता को विदेशी गणमान्य व्यक्तियों से मिलने की अनुमति दी जाएगी और किसे नहीं, तो यह लोकतंत्र की जड़ को कमजोर करता है। उन्होंने कहा कि ऐसी नीतियाँ केवल राजनीतिक असुरक्षा और भय की भावना को बढ़ावा देती हैं, न कि देश की सुरक्षा को।
प्रियंका गांधी ने भी कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में राजनीतिक असुरक्षा इतनी बढ़ गई है कि लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करना मुश्किल हो गया है। उनका यह बयान सरकार के रवैये पर तंज था और इस ओर इशारा करता है कि विपक्ष को अपनी स्वतंत्र भूमिका निभाने में लगातार बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
राहुल और प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार पर यह आरोप लगाया कि वह विपक्ष को वैश्विक नेताओं से मिलने से रोककर राजनीतिक नियंत्रण और असुरक्षा की भावना को बढ़ावा दे रही है। उनका मानना है कि लोकतंत्र तभी स्वस्थ रहेगा जब सत्ता में बैठे दल के अलावा विपक्ष भी स्वतंत्र रूप से अपने अधिकारों और कर्तव्यों का पालन कर सके।