विन न्यूज़ नेटवर्क। इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव को दूसरे कार्यकाल के लिए पुनर्नियुक्त किया गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। नए कार्यकाल की शुरुआत 16 सितंबर 2026 से मानी गई है।
यह अवधि पांच साल या प्रो. श्रीवास्तव के 70 वर्ष की आयु पूरी होने तक रहेगी। दोनों में से जो भी पहले होगा, उसी के आधार पर कार्यकाल समाप्त होगा। विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर भी प्रो. संगीता श्रीवास्तव को कुलपति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
शिक्षा मंत्रालय ने जारी किया आदेश
शिक्षा मंत्रालय के अवर सचिव राजेश कुमार की ओर से 22 सितंबर 2026 को आदेश जारी किया गया। इसमें कुलपति के रूप में प्रो. संगीता श्रीवास्तव की पुनर्नियुक्ति की जानकारी दी गई है। आदेश के मुताबिक उनकी सेवा शर्तें इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अधिनियम, परिनियम और अध्यादेश में तय प्रावधानों के अनुसार रहेंगी।
पहला कार्यकाल नवंबर 2025 में हुआ था पूरा
प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने नवंबर 2020 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति पद की जिम्मेदारी संभाली थी। उनका पहला पांच वर्षीय कार्यकाल 29 नवंबर 2025 को पूरा हो गया था। इसके बाद नए कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होने तक उन्हें पद पर बनाए रखने के लिए कार्यकाल बढ़ाया गया था। अब मंत्रालय ने उन्हें नियमित रूप से दूसरे कार्यकाल के लिए फिर जिम्मेदारी सौंपी है।
विश्वविद्यालय के इतिहास में दूसरी बार मौका
प्रो. संगीता श्रीवास्तव का दोबारा कुलपति नियुक्त होना इलाहाबाद विश्वविद्यालय के लिए भी खास है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, वह विश्वविद्यालय के इतिहास में दूसरा कार्यकाल पाने वाली पहली कुलपति हैं। उनका नया कार्यकाल पांच वर्ष का होगा, हालांकि 70 वर्ष की आयु की शर्त इसके साथ लागू रहेगी।
प्रशासनिक कामकाज में बनी रहेगी निरंतरता
दूसरे कार्यकाल के साथ विश्वविद्यालय में प्रशासनिक और शैक्षणिक स्तर पर कामकाज को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी प्रो. श्रीवास्तव के पास रहेगी। विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर वर्तमान में भी उन्हें कुलपति के तौर पर दर्शाया गया है।
प्रो. श्रीवास्तव के सामने अब अगले पांच वर्षों के दौरान विश्वविद्यालय के शैक्षणिक काम, शोध, प्रशासनिक व्यवस्था और विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। उनके नए कार्यकाल को लेकर विश्वविद्यालय में नियुक्ति से जुड़ी तस्वीर भी साफ हो गई है।