विन न्यूज़ नेटवर्क। शिक्षक दिवस यानी 5 सितंबर 2026 के मौके पर देशभर के उत्कृष्ट शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 27 राज्यों और 7 केंद्र शासित प्रदेशों से चुने गए 48 स्कूल शिक्षकों को सम्मान प्रदान किया। इनमें केंद्रीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय, सैनिक स्कूल, पीएम श्री स्कूल और आदर्श जनजातीय स्कूलों के शिक्षक शामिल रहे।
पढ़ाई को आसान बनाने वाले शिक्षकों का सम्मान
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों ने पढ़ाई को बच्चों के लिए आसान, रोचक और व्यावहारिक बनाने के लिए कई अनोखी पहल की हैं। महाराष्ट्र के शिक्षक वैभव वसंतराव कुलकर्णी ने गणित के कठिन विषयों को सरल तरीके से समझाने के लिए 700 से ज्यादा वीडियो तैयार किए। इसके साथ ही उन्होंने कम लागत वाले मॉडल और नए शिक्षण तरीकों का भी इस्तेमाल किया।
राजस्थान के शिक्षक दिव्येंदु सेन ने भी शिक्षा के क्षेत्र में अलग प्रयोग किया। उन्होंने स्कूल परिसर में मौजूद करीब 500 पेड़ों पर QR कोड लगाए, जिन्हें स्कैन कर बच्चे संबंधित पेड़ के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान से भी जोड़ा और छात्रों के साथ मिलकर 12 नए क्षुद्र ग्रहों की खोज में योगदान दिया।
वर्चुअल लैब से आसान हुई फिजिक्स
पंजाब के शिक्षक दिनेश कुमार ने विद्यार्थियों के लिए वर्चुअल फिजिक्स लैब तैयार की। इसके अलावा उन्होंने 100 से अधिक कम लागत वाले मॉडल बनाए, जिससे बच्चों के लिए भौतिक विज्ञान को समझना आसान हुआ। उनके प्रयासों का उद्देश्य विद्यार्थियों के मन से फिजिक्स का डर दूर करना और विषय को प्रयोग आधारित बनाना रहा।
हिमाचल प्रदेश की मंजरी महाजन ने शिक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी काम किया। उन्होंने स्कूल में कचरा अलग करने, प्लास्टिक एकत्र करने और परिसर को प्लास्टिक मुक्त रखने जैसी पहल को बढ़ावा दिया।
शिक्षकों ने अपनाए डिजिटल और इनोवेटिव तरीके
राजस्थान की डॉ. वर्तिका गुलाटी ने डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करते हुए बच्चों की पढ़ाई जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने Google Meet और Google Forms के जरिए ऑनलाइन कक्षाएं संचालित कीं। वहीं, चंडीगढ़ के रवि जयसवाल ने स्कूल में 3D गुंबद थिएटर और मौसम केंद्र तैयार कर बच्चों को अंतरिक्ष और मौसम विज्ञान को प्रयोग और अनुभव के जरिए समझाने का प्रयास किया।
उत्तर प्रदेश की शिक्षिका शालिनी कुशवाहा ने बच्चों को पढ़ाने के लिए खेल और विभिन्न गतिविधियों को माध्यम बनाया। उनकी पहल से स्कूल में विद्यार्थियों के दाखिले में भी बढ़ोतरी हुई।
PM मोदी ने शिक्षकों से किया संवाद
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बातचीत की। संवाद के दौरान पीएम मोदी ने एक महिला शिक्षक से पूछा कि अगर उन्हें अच्छा पब्लिक स्पीकर बनना हो तो क्या करना चाहिए। इस पर शिक्षक ने जवाब दिया कि एक अच्छे वक्ता के लिए सबसे पहले आत्मविश्वास जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने शिक्षकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षक केवल किताबों का पाठ नहीं पढ़ाते, बल्कि बच्चों को जीवन समझने और आगे बढ़ने की दिशा भी दिखाते हैं।
48 स्कूल शिक्षकों के अलावा अन्य शिक्षकों को भी सम्मान
इस साल 48 स्कूल शिक्षकों के अलावा उच्च शिक्षा संस्थानों और पॉलिटेक्निक के 21 शिक्षक एवं फैकल्टी सदस्य तथा कौशल विकास मंत्रालय के 13 कौशल प्रशिक्षकों को भी राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
तीन चरणों में हुआ शिक्षकों का चयन
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए शिक्षकों का चयन तीन चरणों में किया गया। इसमें जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षकों के कार्यों और उपलब्धियों का मूल्यांकन किया गया। पुरस्कार का उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षकों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित करना और उनके नवाचारों को प्रोत्साहित करना है।
1958 में हुई थी राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार की शुरुआत
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 1958 में हुई थी। इसका उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में बेहतरीन और समर्पित कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मान देना है। ऐसे शिक्षकों का चयन किया जाता है, जिन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, विद्यार्थियों के सीखने और विकास में योगदान देने, नए शिक्षण तरीकों को अपनाने और दूसरे शिक्षकों के लिए उदाहरण पेश करने का काम किया हो।