केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे 8वें वेतन आयोग ने अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने की दिशा में गतिविधियां तेज कर दी हैं। आयोग सरकार को अपनी सिफारिशें सौंपने से पहले देश के विभिन्न हिस्सों में कर्मचारी संगठनों, यूनियनों और सरकारी विभागों से लगातार संवाद कर रहा है। इसी क्रम में अब आयोग की टीम ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर और पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता का दौरा करने जा रही है, जहां विभिन्न हितधारकों के साथ अहम बैठकें आयोजित की जाएंगी।
आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई के नेतृत्व में टीम हाल ही में लखनऊ का दौरा पूरा कर चुकी है। अब 6 और 7 जुलाई को भुवनेश्वर में रेलवे, रक्षा क्षेत्र और अन्य केंद्रीय कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा की जाएगी। इसके बाद 9 और 10 जुलाई को आयोग की टीम कोलकाता पहुंचेगी, जहां पूर्वी भारत के कर्मचारी संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव लिए जाएंगे। माना जा रहा है कि यह दौरा रिपोर्ट तैयार करने से पहले अंतिम दौर की महत्वपूर्ण बैठकों में शामिल होगा।
आयोग केवल कर्मचारी संगठनों से ही सुझाव नहीं ले रहा है, बल्कि विभिन्न मंत्रालयों, सरकारी विभागों और केंद्र शासित प्रदेशों से भी वेतन, भत्तों और पेंशन से जुड़ा विस्तृत आंकड़ा एकत्र कर रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आयोग की सिफारिशें वास्तविक वित्तीय स्थिति और सरकारी खर्च के आकलन के आधार पर तैयार हों। हालांकि कई विभाग अब तक आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं करा सके हैं, जिसके चलते डेटा जमा करने की अंतिम तिथि 30 जून से बढ़ाकर 31 जुलाई 2026 कर दी गई है।
रिपोर्ट को अधिक सटीक और व्यावहारिक बनाने के लिए आयोग विशेषज्ञ सलाहकारों की भी नियुक्ति कर रहा है। विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त सुझावों, आंकड़ों और वित्तीय विश्लेषण के आधार पर आयोग अपनी अंतिम सिफारिशों को अंतिम रूप देगा। मौजूदा प्रगति को देखते हुए माना जा रहा है कि अगस्त से दिसंबर 2026 के बीच रिपोर्ट का अंतिम मसौदा तैयार हो सकता है।
इसके बाद आयोग अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगा। रिपोर्ट वित्त मंत्री के पास भेजी जाएगी, जहां उस पर विचार-विमर्श होगा। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद ही 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की प्रक्रिया शुरू होगी। ऐसे में लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की निगाहें अब आयोग की अंतिम रिपोर्ट और सरकार के फैसले पर टिकी हुई हैं।