ईरान में चल रहे संघर्ष और वैश्विक अस्थिरता के बीच अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इसके बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में लंबे समय से कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार का उद्देश्य आम जनता को वैश्विक बाजार की अस्थिरता के असर से बचाना बताया जा रहा है।
इस नीति के कारण फ्यूल रिटेलर्स पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पेट्रोल पर प्रति लीटर लगभग 20 रुपये और डीजल पर करीब 100 रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं, रिफाइनरी कंपनियां भी बढ़ती लागत और स्थिर कीमतों के बीच घाटे की स्थिति में काम कर रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ब्रेंट क्रूड, जो पहले लगभग 72.87 डॉलर प्रति बैरल था, कुछ समय में बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो तेल कंपनियों के लिए मौजूदा दबाव को संभालना और कठिन हो सकता है।
उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में, विशेषकर चुनावों के बाद, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव देखने को मिल सकता है। कुछ रिपोर्ट्स में 25 से 28 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की आशंका भी जताई गई है, हालांकि यह केवल अनुमान है।
वहीं सरकार ने इन सभी अटकलों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में किसी तरह की बड़ी बढ़ोतरी का कोई प्रस्ताव नहीं है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।