भारत में टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध के बाद प्लेटफॉर्म के संस्थापक और सीईओ पावेल दुरोव ने सरकार के फैसले और रिलायंस को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। दुरोव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई पोस्ट करते हुए दावा किया कि भारतीय टेलीकॉम कंपनी रिलायंस न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी टेलीग्राम की पहुंच को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम प्रतिस्पर्धा को कमजोर करने और व्हाट्सऐप को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
दुरोव के अनुसार, रिलायंस कथित रूप से BGP Hijacking जैसी तकनीक का इस्तेमाल कर यूएई समेत कई देशों में टेलीग्राम की सेवाओं को प्रभावित कर रही है। उनका कहना है कि इस संबंध में कई शिकायतें मिलने के बावजूद कंपनी की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है। उन्होंने नेटवर्क ऑपरेटरों से ऐसी किसी भी अनधिकृत BGP घोषणा को अस्वीकार करने की अपील की, जिससे इंटरनेट रूटिंग में हस्तक्षेप को रोका जा सके और यूजर्स को निर्बाध सेवा मिल सके।
टेलीग्राम प्रमुख ने यह भी संकेत दिया कि भारत में प्लेटफॉर्म पर लगाए गए प्रतिबंध के पीछे रिलायंस और व्हाट्सऐप की संभावित भूमिका हो सकती है। हालांकि, इन आरोपों पर अभी तक रिलायंस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, टेलीग्राम ने सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है।
गौरतलब है कि भारत सरकार ने टेलीग्राम पर 22 जून तक अस्थायी प्रतिबंध लगाया है। सरकार का कहना है कि NEET (UG) 2026 री-एग्जाम की तैयारी कर रहे छात्रों को निशाना बनाने वाले कई फर्जी नेटवर्क टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए सक्रिय हैं। पेपर लीक और धोखाधड़ी से जुड़े मामलों पर रोक लगाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत यह कदम उठाया गया है।
सरकारी फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए दुरोव ने कहा कि पेपर लीक के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने के बजाय टेलीग्राम के 15 करोड़ से अधिक भारतीय यूजर्स को दंडित किया जा रहा है। उनका मानना है कि किसी प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा और इससे केवल आम उपयोगकर्ताओं को परेशानी होगी।
अब इस मामले ने तकनीकी, कानूनी और कारोबारी प्रतिस्पर्धा से जुड़ी बहस को और तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में दिल्ली हाई कोर्ट की सुनवाई और सरकार की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।