पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ शुक्रवार को अचानक रावलपिंडी स्थित सेना मुख्यालय पहुंचे, जहां उन्हें अफगानिस्तान सीमा पर चल रही ताजा झड़पों और सैन्य कार्रवाइयों की विस्तृत जानकारी दी गई।
सैन्य नेतृत्व ने प्रधानमंत्री को 27 फरवरी को हुई इस अहम बैठक में सीमा पर बिगड़ते हालात का पूरा ब्यौरा पेश किया। शहबाज शरीफ ने पाकिस्तानी सेना के अनुशासन और पेशेवर रवैये की सराहना करते हुए कहा कि सेना ने दुश्मन के हर हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया है। उन्होंने पाकिस्तानी वायुसेना द्वारा काबुल और कंधार जैसे तालिबानी ठिकानों पर किए गए हवाई हमलों को ऐतिहासिक कदम बताया।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी साफ शब्दों में स्वीकार किया कि दोनों देश इस वक्त एक खुले युद्ध की स्थिति में हैं। उनके अनुसार, अक्टूबर में कतर की मध्यस्थता से हुए संघर्षविराम के बाद यह अब तक का सबसे भयंकर और खतरनाक टकराव है।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस मौके पर TTP यानी ‘फिटना अल-खवारिज’ और अफगान तालिबान के बीच बढ़ते गठजोड़ पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस तरह के किसी भी गठबंधन को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और पाकिस्तानी सेना को हर उकसावे का करारा जवाब देने की पूरी आजादी दी गई है।
गौरतलब है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच 1947 से ही रिश्ते उलझे रहे हैं। डूरंड रेखा विवाद से लेकर आतंकवाद तक कई मुद्दों ने दोनों देशों के संबंधों को हमेशा तनावपूर्ण बनाए रखा है। तालिबान के बातचीत के संकेतों के बावजूद पाकिस्तान अब किसी भी नरमी के मूड में नहीं दिखता।