2020 से जेल में बंद Umar Khalid को राज्यसभा भेजने की मांग मुस्लिम संगठनों ने कांग्रेस पर दबाव बढ़ाया

Priyanshu Kumari
Priyanshu Kumari
4 Min Read
उमर खालिद को राज्यसभा?

राजस्थान में मुस्लिम संगठनों ने कांग्रेस से विवादास्पद मांग उठाई है जेल में बंद उमर खालिद को राज्यसभा नामित करने की। 23 मार्च को राजस्थान मुस्लिम एलायंस और मुस्लिम प्रोग्रेसिव फोरम ने कांग्रेस नेतृत्व को पत्र लिखा, जिसमें कहा गया कि यह कदम समावेशी राजनीति का प्रतीक बनेगा। जून में राज्यसभा की तीन सीटें खाली होंगी, जहां बीजेपी दो और कांग्रेस एक जीत सकती है। यह मांग कांग्रेस के लिए राजनीतिक दुविधा पैदा कर रही है।

मांग का पूरा मामला क्या है?
पत्र में संगठनों ने तर्क दिया कि 2023 विधानसभा चुनाव में मुस्लिम वोटों ने कांग्रेस को मजबूत किया था। अब अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व जरूरी है। राजस्थान मुस्लिम एलायंस के अध्यक्ष मोहसिन राशिद टोंक ने कहा, “उमर खालिद को राज्यसभा भेजना संवैधानिक मूल्यों और समावेशिता का संदेश देगा।” मुस्लिम प्रोग्रेसिव फोरम के अब्दुल सलाम जौहर ने जोड़ा, “मुस्लिम मतदाताओं को राजनीतिक मान्यता मिलनी चाहिए।” पीटीआई के अनुसार, यह अपील कांग्रेस के वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति मानी जा रही है। जून में चुनावी समीकरण में कांग्रेस की एक सीट पर दावा मजबूत है।

कौन हैं उमर खालिद? उनकी पृष्ठभूमि
उमर खालिद जेएनयू के पूर्व छात्र नेता और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वे ‘यूनाइटेड अगेंस्ट हेट’ से जुड़े रहे और CAA-NRC विरोधी आंदोलनों में मुखर रहे। 2016 से वे छात्र राजनीति में सक्रिय हैं, जहां उन्होंने आरएसएस और BJP नीतियों की आलोचना की। उनकी पहचान बुद्धिजीवी एक्टिविस्ट के रूप में है, जो अल्पसंख्यक अधिकारों पर बोलते हैं। हालांकि, सितंबर 2020 से वे दिल्ली दंगों से जुड़े UAPA मामले में तिहाड़ जेल में बंद हैं। दिल्ली पुलिस का आरोप है कि उन्होंने हिंसा भड़काने की साजिश रची। अदालत में सुनवाई जारी है, बेल बार-बार खारिज हो चुकी है।

राजनीतिक और कानूनी चुनौतियां
राज्यसभा सदस्य चुने जाने के लिए सांसद जेल में भी रह सकते हैं, लेकिन UAPA जैसे गंभीर आरोप विवादास्पद हैं। विपक्षी दलों ने इसे “आतंकवादियों को पुरस्कृत करने” की कोशिश बताया है। BJP ने कांग्रेस पर “वोटबैंक राजनीति” का आरोप लगाया। कानूनी विशेषज्ञ कहते हैं कि नामांकन संभव है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप कर सकता है। कांग्रेस के लिए यह जोखिम भरा है – अल्पसंख्यक वोट मिल सकते हैं, लेकिन हिंदू वोटर नाराज हो सकते हैं। राहुल गांधी की “न्याय यात्रा” में समावेशिता पर जोर है, लेकिन यह परीक्षा बनेगी।

प्रतिक्रियाएं और बहस
मुस्लिम संगठन इसे “अल्पसंख्यक सशक्तिकरण” बता रहे हैं, जबकि BJP प्रवक्ता ने कहा, “दंगाइयों को संसद भेजना राष्ट्रद्रोह है।” सोशल मीडिया पर #UmarKhalidRajyaSabha ट्रेंड कर रहा है। पूर्व JNU छात्रों ने समर्थन किया, लेकिन नागरिक समाज में विभाजन है। राज्यसभा चुनाव जून में होंगे, जहां राजस्थान की तीन सीटें दांव पर हैं। कांग्रेस यदि नामित करेगी, तो यह 2024 लोकसभा चुनावों से पहले बड़ा संदेश होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मांग कांग्रेस की आंतरिक राजनीति को भी प्रभावित करेगी।

उमर खालिद को राज्यसभा भेजने की मांग ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। यह समावेशिता बनाम कानून का मुद्दा बन गया है। कांग्रेस का अगला कदम सभी की नजरों में होगा।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *