रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध अब अपने चौथे साल में प्रवेश कर चुका है, जिसका सीधा असर रूस की अर्थव्यवस्था और उसके सोने के भंडार पर दिखने लगा है। बर्लिन स्थित न्यूज़ आउटलेट bne IntelliNews की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने पिछले 25 वर्षों में पहली बार अपने सेंट्रल बैंक के रिजर्व से बड़े पैमाने पर सोना बेचना शुरू किया है। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2022 से 2025 के बीच रूस ने लगभग 150 बिलियन डॉलर मूल्य का सोना और विदेशी मुद्रा बेची है, जबकि 2026 के शुरुआती दो महीनों में ही 35 बिलियन डॉलर की अतिरिक्त बिक्री दर्ज की गई है।
रूस द्वारा अपना ‘गोल्ड रिजर्व’ खाली करने के पीछे सबसे बड़ी वजह युद्ध पर होने वाला बेतहाशा खर्च है। साल 2026 के लिए रूस ने अपने डिफेंस बजट में रिकॉर्ड 14.5 ट्रिलियन रूबल आवंटित किए हैं, जो सरकार के कुल खर्च का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा है। केवल टैक्स वसूली से इस भारी-भरकम खर्च की भरपाई करना मुमकिन नहीं रह गया है, जिसके कारण रूस को अपने सुरक्षित सोने के भंडार का सहारा लेना पड़ रहा है।
इसके अलावा, पश्चिमी देशों द्वारा रूसी तेल और गैस पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों ने रूस की कमाई के मुख्य जरिए को काफी नुकसान पहुंचाया है। साल 2025 में रूस का बजट घाटा 3.4 प्रतिशत तक पहुंच गया था। इस आर्थिक दबाव से निपटने के लिए रूस ने अपनी रणनीति बदलते हुए अब कागजी लेन-देन के बजाय असली सोने की ईंटें बाजार में बेचना शुरू कर दिया है। इस भारी बिकवाली के कारण रूस का गोल्ड रिजर्व पिछले चार सालों के सबसे निचले स्तर पर आ गया है, जो वहां की अर्थव्यवस्था पर बढ़ते गंभीर संकट की ओर इशारा करता है।