PSLV-C62 मिशन में बड़ा झटका: 16 में से 15 उपग्रह अंतरिक्ष में खोए, लेकिन ‘KID’ ने रचा अपवाद

Vin News Network
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PSLV-C62 मिशन में 15 उपग्रह खोए, लेकिन स्पेन का KID कैप्सूल अलग होकर डेटा भेजने में सफल

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के PSLV-C62 मिशन को सोमवार को एक बड़ा झटका लगा, जब प्रक्षेपण के दौरान तकनीकी गड़बड़ी के कारण 16 में से 15 उपग्रहों को उनकी निर्धारित कक्षा में स्थापित नहीं किया जा सका। हालांकि इस असफलता के बीच एक अप्रत्याशित सकारात्मक पहलू भी सामने आया, जब ‘KID’ नामक एक छोटा तकनीकी प्रदर्शन उपग्रह बाकी सभी बाधाओं के बावजूद रॉकेट से अलग होने और डेटा भेजने में सफल रहा।

यह मिशन ‘EOS-N1’ नाम से जाना गया, जिसे सोमवार सुबह 10:18 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया गया था। 44.4 मीटर ऊँचा यह चार-चरणीय PSLV रॉकेट निर्धारित समय पर लॉन्च हुआ और शुरुआती चरणों में सब कुछ योजना के अनुसार आगे बढ़ता दिखाई दिया।

इस मिशन का उद्देश्य एक मुख्य पृथ्वी अवलोकन उपग्रह और उसके साथ भेजे गए कई सह-यात्री उपग्रहों को लगभग 512 किलोमीटर ऊँची सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट में स्थापित करना था। कुल उड़ान अवधि करीब 17 मिनट की थी। लॉन्च से पहले मिशन निदेशक की अनुमति के बाद स्वचालित प्रक्षेपण अनुक्रम शुरू किया गया और ISRO के वैज्ञानिक मिशन कंट्रोल सेंटर से उड़ान की हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए थे।

हालांकि, स्थिति उस समय बदल गई जब मिशन कंट्रोल सेंटर से “तीसरे चरण के प्रज्वलन” की घोषणा हुई। इसके बाद रॉकेट के उड़ान मार्ग में असामान्य गतिविधियाँ देखी गईं। ISRO के अनुसार, तीसरे चरण के दौरान रॉकेट में गड़बड़ी उत्पन्न हुई, जिससे वाहन अपने निर्धारित पथ से भटक गया।

ISRO अध्यक्ष वी. नारायणन ने बताया कि तीसरे चरण में जब स्ट्रैप-ऑन मोटरें रॉकेट को आवश्यक ऊँचाई तक पहुंचाने के लिए बल प्रदान कर रही थीं, उस समय रॉकेट में कंपन और उड़ान पथ में विचलन देखा गया। उन्होंने कहा कि इस तकनीकी समस्या के कारण उपग्रहों को उनकी इच्छित कक्षा में स्थापित नहीं किया जा सका।

यह लगातार दूसरी बार है जब PSLV मिशन को इस तरह की असफलता का सामना करना पड़ा है। इससे पहले मई 2025 में PSLV-C61-EOS-09 मिशन भी सफल नहीं हो पाया था, जब मोटर प्रेशर में गिरावट और चैंबर प्रेशर से जुड़ी समस्या सामने आई थी।

इस बार PSLV-C62 मिशन में 16 उपग्रह ले जाए जा रहे थे, जिनमें एक विदेशी पृथ्वी अवलोकन उपग्रह भी शामिल था। रिपोर्ट्स के अनुसार, तकनीकी गड़बड़ी के कारण 15 उपग्रह अंतरिक्ष में ही खो गए और वे संभवतः अब अंतरिक्ष मलबे के रूप में भटक रहे हैं।

हालांकि, इस विफलता के बीच एक अपवाद सामने आया। स्पेन की एक स्टार्टअप कंपनी द्वारा विकसित ‘KID’ यानी ‘Kestrel Initial Technology Demonstrator’ नामक छोटा कैप्सूल रॉकेट से अलग होने में सफल रहा। यह कैप्सूल एक री-एंट्री व्हीकल का प्रारंभिक तकनीकी मॉडल था।

कंपनी ऑर्बिटल पैराडाइम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जानकारी दी कि उनका KID कैप्सूल सभी बाधाओं के बावजूद PSLV-C62 से सफलतापूर्वक अलग हुआ, सक्रिय हुआ और उसने डेटा ट्रांसमिट किया। कंपनी के अनुसार, कैप्सूल की उड़ान पथ का पुनर्निर्माण किया जा रहा है और जल्द ही पूरी रिपोर्ट जारी की जाएगी।

मिशन में जिन उपग्रहों को नुकसान पहुंचा, उनमें रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) का ‘अन्वेषा’ उपग्रह भी शामिल था। यह एक उन्नत रणनीतिक निगरानी उपग्रह था, जिसे लगभग 500 किलोमीटर की ऊँचाई से सैन्य छलावरण का पता लगाने के लिए डिजाइन किया गया था।

इसके अलावा ‘आयुलसैट’, जो भारत का पहला इन-ऑर्बिट फ्यूलिंग उपग्रह था, और ‘CGUSAT’ भी इस मिशन में शामिल थे। CGUSAT एक छात्र-निर्मित लो-अर्थ ऑर्बिट उपग्रह था, जिसे आपातकालीन संचार और आपदा प्रबंधन के उद्देश्य से तैयार किया गया था। मिशन में शामिल मुख्य पृथ्वी अवलोकन उपग्रह थाईलैंड और यूनाइटेड किंगडम के संयुक्त सहयोग से विकसित किया गया था।

ISRO के एक पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया कि इस तरह की विफलताओं के बाद एजेंसी को डेटा एकत्र करने, उसका विश्लेषण करने और समस्या के मूल कारण तक पहुंचने में समय लगता है। उन्होंने कहा कि सभी ग्राउंड स्टेशनों से प्राप्त आंकड़ों की गहन जांच के बाद ही आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

ISRO ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर मिशन को लेकर बयान जारी करते हुए कहा कि PSLV-C62 मिशन के तीसरे चरण के अंत में तकनीकी असामान्यता पाई गई है और विस्तृत विश्लेषण शुरू कर दिया गया है। हालांकि, एजेंसी ने औपचारिक रूप से मिशन को “विफल” शब्द से परहेज करते हुए वर्णित नहीं किया।

इसके बाद एक संक्षिप्त प्रेस वार्ता में ISRO प्रमुख वी. नारायणन ने कहा कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार मिशन अपेक्षित उड़ान पथ पर आगे नहीं बढ़ सका। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी ग्राउंड स्टेशनों से प्राप्त डेटा का विश्लेषण पूरा होने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष साझा किए जाएंगे।

इस असफलता के बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि ISRO का ट्रैक रिकॉर्ड मजबूत रहा है और ऐसी तकनीकी चुनौतियाँ अंतरिक्ष अभियानों का हिस्सा होती हैं। KID कैप्सूल की आंशिक सफलता यह भी दर्शाती है कि मिशन के कुछ पहलू अपेक्षित रूप से काम कर रहे थे।

आने वाले दिनों में ISRO द्वारा जारी की जाने वाली विस्तृत रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि PSLV-C62 मिशन में आई गड़बड़ी के पीछे कौन से तकनीकी कारण जिम्मेदार थे और भविष्य के प्रक्षेपणों में उनसे कैसे बचा जाएगा।

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